समीक्षा

पहल का कहानी विशेषांक : सूरज पालीवाल

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता में ज्ञानरंजन द्वारा संपादित ‘पहल’ का योगदान शानदार है, वह कई दशकों से साहित्य और विचार की महत्वपूर्ण पत्रिका बनी हुई है.  इस विकट समय में...

समकालीन हिंदी कविता ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (ओम निश्चल) : शुभा श्रीवास्तव

प्रसिद्ध लेखक-आलोचक ओम निश्चल की इसी वर्ष प्रकाशित ‘आलोचनानुशीलन’ की पुस्तक ‘समकालीन हिंदी कविता ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य (1980-2020) \'विजया बुक\' प्रकाशक से छपी है जो  सदी के अंतिम बीस वर्षों की...

मैनेजर पाण्डेय : शब्द, साधना और आलोचना : सुधि शंकर

मैनेजर पाण्डेय : शब्द, साधना और आलोचना : सुधि शंकर

वरिष्ठ आलोचक प्रो. मैनेजर पाण्डेय आगामी २३ सितम्बर को अपने जीवन के अस्सीवें वर्ष में प्रवेश कर रहें हैं. आलोचक के रूप में वह हिंदी आलोचना में पिछले पांच दशकों...

परख : शकुंतिका (भगवानदास मोरवाल) : कुबेर कुमावत

शकुंतिका : भगवानदास मोरवालपहला संस्करण : २०२०राजकमल प्रकाशन प्रा. लि.१- बी, नेताजी सुभाष मार्ग, दरियागंज, नई दिल्ली- ११०००२मूल्य : पेपरबैक - ६५ हार्ड बैक- २९५   वरिष्ठ कथाकार भगवानदास मोरवाल के राजकमल...

कला की जगहें : सीरज सक्सेना

कलाकार, कवि, गद्यकार सीरज सक्सेना (३० जनवरी १९७४, मध्य-प्रदेश) सिरेमिक, वस्त्र, पेंटिंग, लकड़ी और ग्राफिक कला जैसे विभिन्न माध्यमों में २२ वर्षों से सक्रिय हैं. उन्होंने इंदौर स्कूल ऑफ आर्ट्स...

देवनागरी जगत की दृश्य संस्कृति (सदन झा) : शुभनीत कौशिक

देवनागरी जगत की दृश्य संस्कृति (सदन झा) : शुभनीत कौशिक

समीक्षा कृति से संवाद करती है, और उसके प्रति रुचि पैदा करती है, वह न तो पुस्तक-परिचय है न उसका प्रचार. संवाद के लिए विषय-वस्तु और पृष्ठभूमि से परिचय आवश्यक...

‘एंट्स एमंग एलीफेंट्स (सुजाता गिडला) : शुभनीत कौशिक

‘एंट्स एमंग एलीफेंट्स (सुजाता गिडला) : शुभनीत कौशिक

शुभनीत कौशिक इतिहास के अध्येता हैं, सुजाता गिडला की चर्चित किताब 'एंट्स एमंग एलीफेंट्स: एन अनटचेबल फ़ेमिली एंड द मेकिंग ऑफ मॉडर्न इंडिया' पर लिखी यह उनकी समीक्षा है. इस किताब...

परख : केवल कुछ वाक्य (उदयन वाजपेयी) : मिथलेश शरण चौबे

पेशे से चिकित्सक उदयन वाजपेयी (४ जनवरी-१९६०, सागर) के तीसरे  कविता संग्रह ‘केवल कुछ वाक्य’ का प्रकाशन धौली बुक्स (भुवनेश्वर) ने किया है, जो अधिकतर उड़िया और अंग्रेजी में किताबें...

वैधानिक गल्प: एक इंवेस्टिगेशन रिपोर्ट : सत्यम श्रीवास्तव

कथाकार चंदन पाण्डेय का उपन्यास ‘वैधानिक गल्प’ चर्चा में है. कृति जब अपने समय को छूती है और उसका एक तरह से प्रतिपक्ष रचती है, उसका पूरक बनती है तब...

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