ऋत्विक घटक की कहानियाँ : चंद्रकिरण राठी और श्रद्धा श्रीवास्तव
भारतीय फ़िल्म निर्देशकों में ऋत्विक घटक (4 नवम्बर, 1925 - से 6 फ़रवरी, 1976) का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने बांग्ला में कुछ कहानियाँ भी लिखीं हैं, जिनमें से सात का अनुवाद...
भारतीय फ़िल्म निर्देशकों में ऋत्विक घटक (4 नवम्बर, 1925 - से 6 फ़रवरी, 1976) का महत्वपूर्ण स्थान है. उन्होंने बांग्ला में कुछ कहानियाँ भी लिखीं हैं, जिनमें से सात का अनुवाद...
‘इस तरह खत्म होती है दुनिया/धमाके से नहीं रिरियाहट से.’ नोबेल पुरस्कार प्राप्त- कवि, आलोचक, नाटककार और संपादक टी एस एलियट (1888–1965) ने विश्व साहित्य को गहरे प्रभावित किया है,...
जापना के हिरोशिमा पर जब अमेरिका ने परमाणु बम्ब गिराए तब जो लोग बचे रह गये वह आजीवन कई तरह की समस्याओं से ग्रस्त रहे. उन्हें सामाजिक तौर पर स्वीकार...
इज़ाबेल अलेंदे (चीले,१९४२) लातिन अमेरिकी कथा-जगत की मशहूर हस्ती हैं, उन्हें मार्केज़ और नेरुदा से प्रभावित माना जाता है, स्त्री के अनुभवों पर आधारित उनकी कहानियों में मिथ और यथार्थ ...
स्पेनिश भाषा में लिखने वाले फ़र्नांडो सोर्रेंटीनो की कैफ़ी हाशमी द्वारा हिंदी में अनूदित कहानी ‘जीवनशैली’ समालोचन पर आप पढ़ चुके हैं. प्रस्तुत कहानी ‘वापसी’ का अंग्रेजी से हिंदी अनुवाद...
कभी कंप्यूटर प्रोग्रामर रहे जे. एम. कोएट्जी (जन्म: 9 February 1940) आज अंग्रेजी भाषा और विश्व के बड़े उपन्यासकारों में एक हैं. उनका उपन्यास Disgrace १९९९ में प्रकाशित हुआ था,...
अर्जेंटीना के लेखक फर्नांडो सोर्रेंटिनो (जन्म: 8 नवंबर, 1942) स्पेनिश भाषा में लिखते हैं. अब तक उनके छह कहानी-संग्रह प्रकाशित हुए हैं जिनका पन्द्रह से अधिक भाषाओं में अनुवाद हो...
माणिक बंद्योपाध्याय(9 May 1908 – 3 December 1956) की १९४४ में लिखी प्रसिद्ध कहानी ‘स्वामी-स्त्री’ का बांग्ला से हिंदी में अनुवाद शिव किशोर तिवारी ने किया है. माणिक दा ने ३६...
अंग्रेज़ी भाषा में लेखन करने वाली अमेरिकी कवयित्री लुईज़ ग्लिक (जन्म : 22 अप्रैल 1943) को उनकी कविताओं के लिए वर्ष 2020 का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया. इसके बाद...
उत्तर औपनिवेशिकता और सबाल्टर्न अध्ययन से संबद्ध सुदीप्त कविराज दक्षिण एशियाई राजनीति और बौद्धिक इतिहास के विशेषज्ञ हैं, सम्प्रति कोलम्बिया विश्वविद्यालय के मध्य पूर्वी, दक्षिण एशियाई और अफ्रीकी अध्ययन विभाग...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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