परख : सलीब पर सच (कविता संग्रह) : सुभाष राय
(फोटो : समालोचन )सलीब पर सच (कविता संग्रह)कवि - सुभाष रायसंस्करण : २०१८बोधि प्रकाशन, जयपुर -302006चार दशकों से पत्रकारिता करते हुए समसामयिक विषयों पर सुभाष राय के लिखे हजारों लेख लगभग...
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(फोटो : समालोचन )सलीब पर सच (कविता संग्रह)कवि - सुभाष रायसंस्करण : २०१८बोधि प्रकाशन, जयपुर -302006चार दशकों से पत्रकारिता करते हुए समसामयिक विषयों पर सुभाष राय के लिखे हजारों लेख लगभग...
(राजा रवि वर्मा)गुजराती भाषा के कवि पद्मश्री सितांशु यशश्चंद्र (जन्म: १८/८/१९४१-भुज) के तीसरे काव्य संग्रह वखार (२००९) को २०१७ के सरस्वती सम्मान से अलंकृत करने की घोषणा हुई है. ‘अॉडिस्युसनुंं ...
(पेंटिग : Salman Toor : The Believer with Cap)युवा कथाकार शहादत ख़ान की कहानियां मुस्लिम परिवेश में आकार लेती हैं और किसी न किसी जरूरी मसले को पकड़ने की कोशिश करती...
भुवन सोम (1969) को देखते हुए यह अहसास होता है कि रफ्तार और उन्नत तकनीक ने हिंदी सिनेमा को कहाँ-से-कहाँ पहुंचा दिया है. आज चेतना में धीरे–धीरे घुलती, सौन्दर्यबोध को...
(कृति : Miguel Guía)साहित्य कुलमिलाकर आनंदजाल है, प्रसाद के शब्दों में कहूँ तो ‘इंद्रजाल’. इसका दिलचस्प होना पहली शर्त है. आप तमाम ज्ञान-विज्ञान-तथ्य-तर्क ठूंसकर साहित्य नहीं रच सकते. यह आनंद/यातना...
(Sculpture: by Kay Singla)कथाकार मनीषा कविताएँ भी लिखती हैं. अक्सर कहानियाँ लिखने वाले कवियों से पता नहीं क्यों हम कविताओं की उम्मीद छोड़ बैठते हैं, जबकि उनकी स्वाभाविक इच्छा यह...
समालोचन पर सदाशिव श्रोत्रिय की सेवादार (देवी प्रसाद मिश्र) की प्रकाशित व्याख्या ने सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा है. हिंदी के अलावा दूसरी भाषाओँ में भी इस पर बहस ज़ारी...
(कृति : Mariam Ghani & Erin Ellen Kelly)समालोचन पर सुमीता पहली बार छप रही हैं. कविताएँ ध्यान खींचती हैं, रोकती टोकती हैं, सोचने पर विवश करती हैं. जो दुनिया हमने...
(कृति - Saks Afridi)समकालीन महत्वपूर्ण हिंदी कवि देवी प्रसाद मिश्र की कविता ‘सेवादार’ की सदाशिव श्रोत्रिय द्वारा की गयी व्याख्या पिछले दिनों से बहस मे है. विष्णु खरे का मानना...
(गूगल से साभार)समालोचन के स्तम्भ ‘भाष्य’ के अंतर्गत किसी एक कविता पर व्याख्याता अपने आप को केन्द्रित रखता है और तरह-तरह से उसके मन्तव्य और काव्य-सौन्दर्य को उद्घाटित करता है....
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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