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निज घर : राकेश श्रीमाल

राकेश श्रीमाल की रचनात्मकता के वृत्त में कविता, कथा, कला, संपादन, पत्रकारिता सब एक दूसरे में घुले मिले हैं. उपन्यास लिखते –लिखते कविताएँ लिखने बैठ जाते हैं, तो कभी इनके...

कथा- गाथा : क से ‘कहानी’ ज से ‘जंगल’ घ से ‘घर’ : कविता

        by Cristina Arrivillagaकविता का नाम हिंदी कथाकारों में सम्मान के साथ लिया जाता है. उनके पांच कहानी संग्रह और दो उपन्यास प्रकाशित हैं.  उनकी इस नई कहानी...

सबद भेद : विद्रोही की काव्य-संवेदना और भाषिक प्रतिरोध : संतोष अर्श

कवि विद्रोही सालों तक अपनी कविता को ओढ़ते–बिछाते रहे. जिस तरह से उनके जीवन का कोई मध्यवर्गीय अनुशासन नहीं था उसी तरह अपनी कविताओं को भी उन्होंने इस धरती और...

परख : किरदार (मनीषा कुलश्रेष्ठ)

 कहानी संग्रह - किरदार  लेखिका- मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशक- राजपाल एण्ड संन्ज़,  दिल्ली मूल्य- रू- 195 प्रथम संस्करण-2018समीक्षाबदलते    वक्त      के    रू-ब-रू     किरदारमीना बुद्धिराजायथार्थ का वर्णन कथाकार के लिए जरूरी है लेकिन एक अच्छी कहानी...

केदारनाथ सिंह : सौन्दर्यात्मक संवेदनशीलता की कविता : रवि रंजन

केदारनाथ सिंह की मानवीय उपस्थिति और उनके कवि-–कर्म का हिंदी साहित्य पर पड़े गहरे प्रभाव को लक्षित किया जाता रहा है. अब जब वह नहीं हैं उनकी कविताएँ हमारे आस-...

भाष्य : पतंग (आलोकधन्वा) : सदाशिव श्रोत्रिय

१९७६ में लिखी गयी ‘पतंग’ कविता आलोकधन्वा के एकमात्र संग्रह ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (प्रकाशन -१९९८) में संकलित  है.  यह आलोकधन्वा  की कुछ बेहतरीन कविताओं में से एक है, जो...

बाबुषा : पूर्व-कथन

  कविता भाषा में लिखी जाती है, भाषा समुदाय की गतिविधियों के समुच्चय का प्रतिफल है. उसमें स्मृतियों से लेकर सपने तक समाएं हुए हैं. दार्शनिक इस सामुदायिक गतिविधियों के प्रकटन...

लल्द्यद के ललवाख : अग्निशेखर

लगभग चार महीने पहले वेदराही के उपन्यास ‘ललद्यद’ की योगिता यादव द्वारा लिखी समीक्षा समालोचन पर प्रकाशित हुई थी. उस समय यह विचार हुआ था कि उनकी कविताओं (‘वाखों’) के...

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