कथा – गाथा : राजजात यात्रा की भेड़ें : किरण सिंह
\"किरण के पास कथा कहने की समर्थ शैली है और कथा के चरित्रों की मन:स्थितियों की गहरी समझ है.\" २०११ में नामवर सिंह के दिए इस कथन के साथ \'पहल\' के...
Home » Uncategorized » Page 11
\"किरण के पास कथा कहने की समर्थ शैली है और कथा के चरित्रों की मन:स्थितियों की गहरी समझ है.\" २०११ में नामवर सिंह के दिए इस कथन के साथ \'पहल\' के...
राकेश श्रीमाल की रचनात्मकता के वृत्त में कविता, कथा, कला, संपादन, पत्रकारिता सब एक दूसरे में घुले मिले हैं. उपन्यास लिखते –लिखते कविताएँ लिखने बैठ जाते हैं, तो कभी इनके...
आज राहुल सांकृत्यायन जीवित रहते थे तो अपना १२५ वाँ जन्म दिन मना रहे होते. पर जब वह आज नहीं हैं (और इतना लम्बा भौतिक जीवन संभव भी नहीं है)...
by Cristina Arrivillagaकविता का नाम हिंदी कथाकारों में सम्मान के साथ लिया जाता है. उनके पांच कहानी संग्रह और दो उपन्यास प्रकाशित हैं. उनकी इस नई कहानी...
कवि विद्रोही सालों तक अपनी कविता को ओढ़ते–बिछाते रहे. जिस तरह से उनके जीवन का कोई मध्यवर्गीय अनुशासन नहीं था उसी तरह अपनी कविताओं को भी उन्होंने इस धरती और...
कहानी संग्रह - किरदार लेखिका- मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशक- राजपाल एण्ड संन्ज़, दिल्ली मूल्य- रू- 195 प्रथम संस्करण-2018समीक्षाबदलते वक्त के रू-ब-रू किरदारमीना बुद्धिराजायथार्थ का वर्णन कथाकार के लिए जरूरी है लेकिन एक अच्छी कहानी...
केदारनाथ सिंह की मानवीय उपस्थिति और उनके कवि-–कर्म का हिंदी साहित्य पर पड़े गहरे प्रभाव को लक्षित किया जाता रहा है. अब जब वह नहीं हैं उनकी कविताएँ हमारे आस-...
१९७६ में लिखी गयी ‘पतंग’ कविता आलोकधन्वा के एकमात्र संग्रह ‘दुनिया रोज़ बनती है’ (प्रकाशन -१९९८) में संकलित है. यह आलोकधन्वा की कुछ बेहतरीन कविताओं में से एक है, जो...
कविता भाषा में लिखी जाती है, भाषा समुदाय की गतिविधियों के समुच्चय का प्रतिफल है. उसमें स्मृतियों से लेकर सपने तक समाएं हुए हैं. दार्शनिक इस सामुदायिक गतिविधियों के प्रकटन...
लगभग चार महीने पहले वेदराही के उपन्यास ‘ललद्यद’ की योगिता यादव द्वारा लिखी समीक्षा समालोचन पर प्रकाशित हुई थी. उस समय यह विचार हुआ था कि उनकी कविताओं (‘वाखों’) के...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum