सबद भेद : प्रतिरोध और साहित्य : कात्यायनी
(फोटो द्वारा - Constantine Manos)साहित्य से सत्ता (धर्म, राज्य, समाज, परिवार) के तनावपूर्ण सम्बन्धों को देखा-समझा जाता रहा है, उसकी भूमिका और उसके महत्व पर भी लिखा गया है. २१...
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(फोटो द्वारा - Constantine Manos)साहित्य से सत्ता (धर्म, राज्य, समाज, परिवार) के तनावपूर्ण सम्बन्धों को देखा-समझा जाता रहा है, उसकी भूमिका और उसके महत्व पर भी लिखा गया है. २१...
राजेश जोशी के दूसरे कविता संग्रह ‘एक दिन बोलेंगे पेड़’(१९८०) में एक कविता संकलित है ‘बिजली सुधारने वाले’. सदाशिव श्रोत्रिय ने इस कविता पर यह टिप्पणी भेजी है जो कविता...
अभिनेत्री श्री देवी के सम्मान में _______________________कला माध्यमों में सिनेमा को अपार लोकप्रियता मिली है, वह हमारे सार्वजनिक जीवन में हर जगह उपस्थित है. वह अब हमारी संस्कृति का अटूट...
कृष्णा सोबती के लेखन पर समालोचन पर आपने रवीन्द्र त्रिपाठी का आलेख पढ़ा - \'पहले दिल-ए-गुदाख़्ता पैदा करे कोई’. इसी क्रम में आज प्रस्तुत है नंद भारद्वाज का आलेख –...
महाकवि मलिक मुहम्मद जायसी का महाकाव्य ‘पदमावत’ इधर चर्चा में रहा है. इस (कु)चर्चा में ‘पदमावती’ रही है, जायसी की कृति के मन्तव्य, प्रासंगिकता और सौष्ठव की चर्चा नदारत थी.किसी...
ऋतुओं का नायक बसंत साहित्य में भी अपने नायकत्व के साथ उपस्थित है. वह सुन्दर, सबल और शुभ है. वह पोषक है. वह प्रकृति में नव जीवन भरता है. वह...
निवेदिता का रंगमंच से जुडाव है. पत्रकारिता का लंबा अनुभव रहा है. महिला मुद्दों पर सक्रिय रहती हैं. निवेदिता का पहला कविता संग्रह –‘ज़ख़्म जितने थे’ २०१४ में प्रकाशित हुआ...
किन्नौर और स्पीति का यह यात्रा-वृतांत जिजीविषा और जीवट की भी यात्रा है. दुर्गम जगहों को इसी जीवट ने मनुष्य की बस्तियों में बदल दिया है. कल्पना पंत ने बड़े...
वे हमें हमारे वजूद की याद दिलाते है.अहसास कराते हैं.एक वजूद वाली औरत कोप्यार करने का,उस पर क़ाबू पाने का मज़ा ही कुछ और है.(जादू नहीं कविता : कात्यायनी)देवी प्रसाद...
आलोचक–कथाकार दूधनाथ सिंह (1936-2018) को तो हम सब जानते हैं पर कवि दूधनाथ के विषय में अल्प चर्चा देखने को मिलती है. उनकी स्मृति में सदाशिव श्रोत्रिय ने अर्थगर्भित आलेख लिखा...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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