परिप्रेक्ष्य : भारत भवन : मनीष पुष्कले
भोपाल में जब कोई पहली बार भारत भवन जाता है तब उसकी पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि भारत में ऐसी जगहें हैं ?इस फरवरी में भारत भवन अपनी स्थापना...
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भोपाल में जब कोई पहली बार भारत भवन जाता है तब उसकी पहली प्रतिक्रिया यही होती है कि भारत में ऐसी जगहें हैं ?इस फरवरी में भारत भवन अपनी स्थापना...
by David Hodgsonअविनाश मिश्र का यह लेख गोविन्द मिश्र के उपन्यास ‘शाम की झिलमिल’ तक अपने को सीमित नहीं रखता, साहित्य में उम्रदराज पीढ़ी और उनके लेखन में ढलती उम्र...
by georgemckimकविता क्या है, किसलिए है ? आदि जिज्ञाषाएं प्राचीनतम है. हर भाषा के काव्यशास्त्र में इनपर कुछ न कुछ सोच–विचार आपको मिलेगा. संस्कृत काव्यशास्त्र में आनंद, सीख, यश आदि कविता के प्रयोजन...
वर्तमान के संघर्ष का युद्ध- क्षेत्र अतीत होता है. औपनिवेशिक शासकों ने भारतीय मिथकों को अपने हितों के सहयोगी इतिहास के रूप में सृजित किया. प्रतिक्रिया में मिथकों को समझने...
प्रेमचंद के ‘गोदान’ और उदय प्रकाश के ‘मोहन दास’ के बीच समय का बड़ा फासला है पर इन कृतियों के पात्रों के जीवन स्तर में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया...
प्रवासी लेखन (Diaspora literature) आज विश्व में चर्चा और चिंतन का विषय बना हुआ है. हिंदी प्रवासी लेखकों में मारीशस के वरिष्ठ कथाकार रामदेव धुरंधर का अहम मुकाम है. प्रवासी...
समकालीन महत्वपूर्ण कवि नरेन्द्र पुण्डरीक के चार कविता संग्रह – ‘नगें पाँव का रास्ता’ (१९९२), ‘सातों आकाशों की लाडली’ (२०००), ‘इन्हें देखने दो इतनी ही दुनिया’ (२०१४) तथा ‘इस पृथ्वी...
Aisha Khalid सरमैं कक्षा ११ की छात्र हूँ. मैं आपको अपनी एक कविता भेज रही हूँ. उम्मीद है, आप...
कृति : saad-qureshiपश्चिमी उत्तर प्रदेश (पीलीभीत) के अबीर आनंद सैनिक स्कूल घोड़ाखाल (नैनीताल), हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (कानपुर), आई. आई. टी. (खड़गपुर) और IIM (कलकत्ता) से होते हुए इस्पात, आयल एंड...
1992 में प्रकाशित रॉबर्ट जेम्स वालर का उपन्यास "द ब्रिजेज ऑफ़ मेडीसन काउन्टी" बीसवीं शताब्दी के सर्वाधिक बिकने वाले उपन्यासों में शुमार है और कहा जाता है कि अब तक...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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