परिप्रेक्ष्य : मैकलुस्की गंज : सतीश जायसवाल
(विकास कुमार झा , उषा उथुप और सतीश जायसवाल)कैलकटा में मैकलुस्की गंज का एक दिन सतीश जायसवालप्रभा खेतान फाउण्डेशन, कोलकता ने विकास कुमार झा...
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(विकास कुमार झा , उषा उथुप और सतीश जायसवाल)कैलकटा में मैकलुस्की गंज का एक दिन सतीश जायसवालप्रभा खेतान फाउण्डेशन, कोलकता ने विकास कुमार झा...
हमारे समय के महत्वपूर्ण कवि शिरीष कुमार मौर्य की कविताएँ आपके लिए.शिरीष को समालोचन की तरफ से जन्म दिन की बहुत-बहुत बधाई.शिरीष कुमार मौर्य भूस्खलनसड़कों पर खंड-खंड पड़ा है हृदयमेरे पहाड़...
जिसके चिंतन और कर्म के केंद्र में सबसे अंतिम व्यक्ति है उसे क्रांतिकारी नहीं माना गया. जो यह कहता था कि अगर मेरा पुनर्जन्म हो तो किसी दलित के घर...
(Naiza Khan : On the Front Line)‘याचनाएं जिनका व्यर्थ होनानिश्चित था.’पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर २७ वर्षीय शुभम अग्रवाल अपने पहले कविता संग्रह की तैयारी में हैं. शीर्षकविहीन इन कविताओं में मृत्यु,...
जॉर्ज ऑरवेल (George Orwell) की किताब ‘एनीमल फार्म’ (Animal Farm) १७ अगस्त १९४५ को अंग्रेजी में प्रकाशित हुई थी. ७२ साल बाद हिंदी में इसका मंगलमूर्त्ति द्वारा किया गया एक...
संस्कृत के प्रख्यात विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी के लेख ‘अभिनवगुप्त की कविता\' पर अपनी आपत्तियों से संवाद को आगे बढ़ा रहे हैं मार्क्सवादी आलोचक अरुण माहेश्वरी. क्या ‘हिन्दू’ धर्म को किसी सेमेटिक...
मसीह अलीनेजाद अब किसी परिचय की मोहताज़ नहीं हैं. औरतों की आज़ादी और खुदमुख्तारी के लिए उनका संघर्ष ईरान से निकलकर पूरी दुनिया में फैल चुका है. मसीह अलीनेजाद से...
अजेय की कविताओं की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है. वह जीवन की आपा-धापी और विकास की विकृतियों के बीच अंतिम आदमी के धूप- छाँव के कवि हैं. वह आदमी किसी...
courtesy : tumblrचित्रकार-लेखक \'अखिलेश\' और कथाकार–संपादक \'अखिलेश\' से हम सब परिचित हैं. जब एक तीसरे \'अखिलेश\' नें मुझे कविताएँ भेजी तो मैं संशयग्रस्त हो गया. कविताएँ पहली बार पढ़ रहा था....
कश्मीर की चौदहवीं सदी की संत कवयित्री ललद्यद अर्थात लल्लेश्वरी के जीवन के विषय में तमाम तरह की किंवदन्तियाँ प्रचलित हैं. वेद राही ने ललद्यद नाम से उपन्यास लिखा है,...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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