मीमांसा : फ्रिट्ज लैंग का सिनेमा : प्रचण्ड प्रवीर
सिनेमा और नाट्य शास्त्र के अन्त:सम्बन्धों पर युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर शोध और गम्भीर विवेचना का कार्य कर रहे हैं. इस विषय पर उनकी एक किताब भी प्रकाशित है- ‘अभिनव...
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सिनेमा और नाट्य शास्त्र के अन्त:सम्बन्धों पर युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर शोध और गम्भीर विवेचना का कार्य कर रहे हैं. इस विषय पर उनकी एक किताब भी प्रकाशित है- ‘अभिनव...
निर्मला पुतुल से संतोष अर्श के इस संवाद में लेखन प्रक्रिया, वैचारिक संरचना और स्त्री की सामाजिकता (जेंडर) के कई स्तरों की चर्चा है.एक आदिवासी स्त्री के तथाकथित मुख्य धारा...
(कृति : stuart Amos) समाज में हो रहे अच्छे बुरे बदलावों को कला और साहित्य सबसे पहले देखते और दिखाते हैं. खासकर कहानियां जब सन्दर्भ में किसी घटना को रखती हैं तब...
उत्तर महाभारत की कृष्ण कथा को आधार बनाकर लिखा गया वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह का उपन्यास ‘उपसंहार’ कृष्ण के मिथकीय अभिप्रायों की नवीन व्याख्याओं के कारण आज भी बहस में...
हमने कांग्रेस-जनसंघ-संसोपा-भाजपा-सपा-बसपा-अवामी लीग-लोकदल-राजद-हिंदू महासभा-जमायते इस्लामीवगैरह वगैरह के लोंदों से जो बनायावह भारतीय मनुष्य का फौरी पुतला हैमुझे भूरी-काली मिट्टी का एक और मनुष्य चाहिएमुझे एक वैकल्पिक मनुष्य चाहिए.(कोई और/देवीप्रसाद मिश्र)देवीप्रसाद...
हिंदी भाषा को लेकर बार-बार दुहराए जाने वाली एक मांग यह भी है कि वह सहज सरल हो. यह ठीक है कि उसे जानबूझकर अबूझ न बनाया जाए. अनावश्यक रूप...
गजानन माधव मुक्तिबोध (१३ नवंबर १९१७ : ११ सितंबर १९६४) ने कविता और आलोचना के साथ-साथ कहानियाँ भी लिखी हैं. ‘काठ का सपना और ‘सतह से उठता आदमी’ उनके दो...
चित्र : स्लावोय जिजेकजनता कभी-कभी अप्रत्याशित निर्णय लेती है. अराजकता, अकुशलता, साम्प्रदायिकता, हिंसा, भ्रष्टाचार, पक्षपात आदि से व्यथित होकर वह प्रतिपक्ष में खड़े व्यक्ति या संगठन को अपना समर्थन देती...
लवली गोस्वामी का अभी कोई कविता संग्रह प्रकाशित नहीं हुआ है, उनकी कविताएँ भी इधर ही समाने आयी हैं. पर जिस तरह से उन्होंने हिंदी कविता के सह्रदय सचेत पाठकों...
राहुल द्विवेदी कविताएँ लिखते हैं. छिटपुट प्रकाशन भी हुआ है. अन्तराल के बाद फिर सक्रिय हुए हैं. यह कविता मुझे ठीक लगी. निरंतरता बनाएं रखें और संग्रह भी जल्दी आए...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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