गणेश विसपुते : कविताएँ और स्मृतियाँ
गणेश विसपुते मराठी के महत्वपूर्ण कवि, विचारक, चित्रकार हैं. उनकी सात कविताएँ और उनका एक स्मृति आलेख ख़ास आपके लिए. मराठी से अनुवाद किया है यशस्वी लेखक भारतभूषण तिवारी ने....
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गणेश विसपुते मराठी के महत्वपूर्ण कवि, विचारक, चित्रकार हैं. उनकी सात कविताएँ और उनका एक स्मृति आलेख ख़ास आपके लिए. मराठी से अनुवाद किया है यशस्वी लेखक भारतभूषण तिवारी ने....
हिंदी के कथाकार अगर कवि भी हैं तो उन्हें अक्सर यह शिकायत रहती है कि उनके कवि पक्ष को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है. उदय प्रकाश जितने बड़े कथाकार हैं...
कृति : Louise Bourgeoisकथाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ के छह कहानी संग्रह और चार उपन्यास प्रकाशित हैं. लोकप्रिय कहानियों का विदेशी एवं भारतीय भाषाओं में अनुवाद हुआ है. बिरजू महाराज पर एक पुस्तक...
निधन के तुरंत बाद प्रकाशित महान नृत्यांगना इज़ाडोरा डंकन की आत्मकथा ‘My Life’ ने उन्हें एक महान नारीवादी लेखिका में बदल दिया था, इस आत्मकथा को अब क्लासिक का दर्ज़ा...
पूंजी के वैश्वीकरण ने किस तरह पारम्परिक पेशे और उससे जुड़े समूहों को बर्बाद किया है, इसे समझना हो तो वरिष्ठ कथाकार सुभाष पंत की यह कहानी ‘अ स्टिच इन...
यह कहानी बस इतनी है कि क़ुरबानी के लिए बच्चे की तरह पोसे गए बकरे से घर भर को लगाव हो जाता है. जिस अम्मी ने उसे पाला वह बाद...
(पेंटिग : जनगढ़ सिंह श्याम )चंद्रेश कुमार छतलानी सॉफ्टवेयर डेवलेपर हैं और लघु कथाएं लिखते हैं. उनकी पांच लघुकथाएं आपके लिए.चंद्रेश कुमार छतलानी : लघु कथाएं ...
\'बन्नी दाई बन्नी दाई मुझे बचाओ मुझे बचाओ मेरी आंखों पर बंधी पट्टी खोलो मेरे अंतस पर जड़ा ताला तोड़ोमेरा पूरा वज़ूद दब रहा है बज्र किवाड़ से मुझे बचाओ बन्नी दाई ?\'अपने ही...
नन्द चतुर्वेदी के अंतिम कविता संग्रह– ‘आशा बलवती है राजन्’ पर हिमांशु पंड्या की यह समीक्षा मन से लिखी गयी है, एक तरह से यह कवि से संवाद है. कवि...
गोपाल माथुर के उपन्यास \'धुँधले अतीत की आहटें\' की समीक्षा विमलेश शर्मा की कलम से .अनाम खामोशियों, स्थगित जीवन और निर्वासित मन का राग विमलेश शर्मा अतीत कितना भी धुँधला क्यों ना...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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