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अन्यत्र : संघ चिठ्ठा : अखिलेश

मशहूर चित्रकार और लेखक अखिलेश १९९७  में भारत महोत्सव के दरमियान मास्को गए थे. ये संस्मरण उसी दौर के दर्द ओ गम बयाँ करते है.महान से महान विचार और आन्दोलन...

सिद्धेश्वर सिंह की कविताएँ

उतराखंड के खटीमा में सिद्धेश्वर सिंह ने कविता की रौशनी बरकरार रखी है. दो संग्रह प्रकाशित हैं, वे विदेशी कविताओं का हिन्दी में लगातार अनुवाद कर रहे हैं. उनकी कविताएँ...

रंग- राग : पाँचवां अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल : भास्कर उप्रेती

नैनीताल के समीप नौकुचियाताल में ‘लेक साइड डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल’ (एल.डी.एफ.) का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से हो रहा है. इस साल  14 से 17 अप्रैल तक आयोजित पाँचवे अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री...

सविता सिंह के लिए (कविता) : विपिन चौधरी

समकालीन कवियों पर कविताएँ लिखने की रवायत है.  शमशेर, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल त्रिलोचन आदि ने एक दूसरे पर खूब कविताएँ लिखी हैं. सुधीर सक्सेना का एक कविता संग्रह इधर आया...

कथा – गाथा : सुराख़ : प्रज्ञा पाण्डेय

(ASHISH AVIKUNTHAK : ENDNOTE (ANTARAL)एक ट्रेन में एक लड़की से एक अफसर मिलता है उनमें बातें होती हैं और बातों में  आकार लेती है यह कहानी. कहानी मार्मिक है. पठनीय है....

सहजि सहजि गुन रमैं : संतोष अर्श

(गूगल से साभार)संतोष अर्श की कविताओं की तेवर तुर्शी अलग से दिखती है, वे समकालीनता के विद्रूप पर हमलावर हैं, जातिगत विडम्बनाओं पर मुखर हैं.  कविता का ढब भी बदलता ...

सहजि सहजि गुन रमैं : आशीष नैथानी

(फोटोग्राफ : कमल जोशी)लगभग तीन वर्ष पूर्व आशीष नैथानी की कविताएँ समालोचन में प्रकाशित हुईं थीं. कविताएँ अब और परिपक्व हुई हैं उनका ‘लोकल’ अभी भी रचनात्मक बना हुआ है. पहाड़, बर्फ,...

सबद – भेद : अयोध्या प्रसाद खत्री : राजीव रंजन गिरि

आज यह अविश्वसनीय लग सकता है कि एक समय  हिंदी को कविता के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता था. खड़ी बोली हिंदी के पितामह भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने खुद इसका समर्थन...

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