अन्यत्र : संघ चिठ्ठा : अखिलेश
मशहूर चित्रकार और लेखक अखिलेश १९९७ में भारत महोत्सव के दरमियान मास्को गए थे. ये संस्मरण उसी दौर के दर्द ओ गम बयाँ करते है.महान से महान विचार और आन्दोलन...
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मशहूर चित्रकार और लेखक अखिलेश १९९७ में भारत महोत्सव के दरमियान मास्को गए थे. ये संस्मरण उसी दौर के दर्द ओ गम बयाँ करते है.महान से महान विचार और आन्दोलन...
उतराखंड के खटीमा में सिद्धेश्वर सिंह ने कविता की रौशनी बरकरार रखी है. दो संग्रह प्रकाशित हैं, वे विदेशी कविताओं का हिन्दी में लगातार अनुवाद कर रहे हैं. उनकी कविताएँ...
(The Music Of Love. This picture was taken in Tenganan Village, Bali (2010). Tenganan is the most famous Bali Aga (original Balinese)village and is located close to CandiDasa in East...
(पेंटिग : Anjolie Ela Menon : After the Party : 2017)आज मजदूर दिवस है. हिंदी का साहित्यकार अब भी कलम का मजदूर ही है. वे और भाषाएँ होंगी जिनके लेखक...
नैनीताल के समीप नौकुचियाताल में ‘लेक साइड डाक्यूमेंट्री फेस्टीवल’ (एल.डी.एफ.) का आयोजन पिछले कुछ वर्षों से हो रहा है. इस साल 14 से 17 अप्रैल तक आयोजित पाँचवे अंतर्राष्ट्रीय डाक्यूमेंट्री...
समकालीन कवियों पर कविताएँ लिखने की रवायत है. शमशेर, नागार्जुन, केदारनाथ अग्रवाल त्रिलोचन आदि ने एक दूसरे पर खूब कविताएँ लिखी हैं. सुधीर सक्सेना का एक कविता संग्रह इधर आया...
(ASHISH AVIKUNTHAK : ENDNOTE (ANTARAL)एक ट्रेन में एक लड़की से एक अफसर मिलता है उनमें बातें होती हैं और बातों में आकार लेती है यह कहानी. कहानी मार्मिक है. पठनीय है....
(गूगल से साभार)संतोष अर्श की कविताओं की तेवर तुर्शी अलग से दिखती है, वे समकालीनता के विद्रूप पर हमलावर हैं, जातिगत विडम्बनाओं पर मुखर हैं. कविता का ढब भी बदलता ...
(फोटोग्राफ : कमल जोशी)लगभग तीन वर्ष पूर्व आशीष नैथानी की कविताएँ समालोचन में प्रकाशित हुईं थीं. कविताएँ अब और परिपक्व हुई हैं उनका ‘लोकल’ अभी भी रचनात्मक बना हुआ है. पहाड़, बर्फ,...
आज यह अविश्वसनीय लग सकता है कि एक समय हिंदी को कविता के लिए उपयुक्त नहीं समझा जाता था. खड़ी बोली हिंदी के पितामह भारतेंदु हरिश्चन्द्र ने खुद इसका समर्थन...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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