लवली गोस्वामी की कविता : आलाप
लम्बी कविताआ ला पलवली गोस्वामीवांछित का अभाव सारांश है स्मृतियों की किताब का तमाम स्मृतियाँ “विदा” के एक अकेले शब्द की वसीयत हैंहँसती आँखों के सूनेपन में क़ैद हो गए वे...
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लम्बी कविताआ ला पलवली गोस्वामीवांछित का अभाव सारांश है स्मृतियों की किताब का तमाम स्मृतियाँ “विदा” के एक अकेले शब्द की वसीयत हैंहँसती आँखों के सूनेपन में क़ैद हो गए वे...
क्या आपको नहीं लगता भारतीय समाज गहरे संकट से गुजर रहा है ? एक मनोरोगी की तरह इधर वह व्यवहार कर रहा है. सहिष्णुता और उदारता जैसे मूल्य देखते –...
प्रियदर्शन NDTV में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. हिंदी के लेखक और कवि हैं. कुछ महत्वपूर्ण कृतियों के अनुवाद भी उनके नाम है - आधी रात की संतानें (सलमान रुश्दी), बहुजन...
(पेंटिग - Haren Das : Joint Effort)हरे प्रकाश उपाध्याय को आज हम ‘मंतव्य’ के संपादक और ‘बखेड़ापुर’ के उपन्यासकार के तौर पर जानते हैं. पर वह मूलतः कवि हैं...
वरिष्ठ आलोचक नामवर सिंह की १९८२ में प्रकाशित पुस्तक ‘दूसरी परंपरा की खोज’ आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी के ‘चिंतन और सृजन में विद्यमान मौलिकता को रेखांकित’ करती है. आचार्य के व्यक्तित्व...
(कृति - Mark-Jenkins) परमेश्वर फुंकवाल ने कविता की दुनिया में हालाँकि देर से प्रवेश किया पर अब उन्होंने पिछला सब पूरा कर लिया है. शिल्प और कथ्य दोनों स्तरों पर...
अभिनव मुक्तिबोध : साहित्य का पुनर्संदर्भीकरण (recontextualisation)अरुण माहेश्वरी (एक) सिर्फ रामचंद्र शुक्ल, हजारीप्रसाद द्विवेदी, रामविलास शर्मा, नामवर सिंह, अज्ञेय, केदारनाथ सिंह और साहित्य के स्वघोषित महापौर अशोक वाजपेयी ही नहीं,...
२१ वीं सदी के हिंदी कथा-साहित्य में जिन युवा रचनाकारों की पहचान-प्रतिष्ठा बनी है उनमें नीलाक्षी सिंह का नाम प्रमुख है. चार कहानी संग्रह और एक उपन्यास प्रकाशित है. उनकी...
आज आपके समक्ष प्रस्तुत है युवा कवि घनश्याम कुमार देवांश की कुछ कविताएँ. उन्हें उनकी कविता पाण्डुलिपि \'आकाश में देह\' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ का वर्ष 2016 का नवलेखन...
(Painting : “Father” by Gwenn Seemel ) पिता पर लिखना हमेशा से मुश्किल होता है. बाप–बेटे के रिश्ते अहमं के भी होते हैं. पिता अक्सर पुत्रों के लिए पीछे हट...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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