सहजि सहजि गुन रमैं : उत्पल बैनर्जी
(आभार सहित फोटो द्वारा youth ki awaaz)उत्पल बैनर्जी ने बांग्ला भाषा से हिन्दी में स्तरीय अनुवाद किये हैं, वे हिंदी के समर्थ कवि भी हैं. उनका पहला संग्रह ‘लोहा बहुत...
Home » Uncategorized » Page 23
(आभार सहित फोटो द्वारा youth ki awaaz)उत्पल बैनर्जी ने बांग्ला भाषा से हिन्दी में स्तरीय अनुवाद किये हैं, वे हिंदी के समर्थ कवि भी हैं. उनका पहला संग्रह ‘लोहा बहुत...
राजाराम भादू संस्कृति पर लिखने वाले प्रखर आलोचक हैं. उनका संस्कृति-बोध समाजिक विकास और राजनीतिक स्थितियों को ध्यान में रखते हुए विकसित हुआ है और सीधे वर्तमान में हस्तक्षेप करता है.सत्ताएं अंतत:...
प्रसिद्ध आलोचक – विचारक पुरुषोत्तम अग्रवाल की कथा – कृति ‘नाकोहस’ अपने प्रकाशन से ही लगातार चर्चा में है. समालोचन पर भी इसे लेकर जानदार बहस मुबाहिसे हुए. ऐसा लगता...
कथा मौखिक रही है, इन्हें सबसे पहले हम घरों में अपने अग्रजों से सुनते थे. इसकी सहजता, रोचकता और सीख का अब भी कोई विकल्प नहीं है. इस विकल्पहीन समय...
(फोटो : Santosh Verma : Romancing the Rains)विजया सिंह की कुछ कविताएँ लगभग तीन वर्ष पूर्व प्रकाशित हुई थीं, आज उनकी कुछ नई कविताओं के साथ समालोचन फिर उपस्थित है.पहली...
नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन (१० जनवरी १९७५) की स्मृति में १० जनवरी को प्रति वर्ष विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है. इसका उद्देश्य विश्व में हिन्दी के...
फोटो : Michael Kenna कविता मनुष्यता की पुकार है. जब कहीं चोट लगती है, दिल दुखता है, हताशा घेरती है मनुष्य कविता के पास जाता है. उसे पुकारता है. उसे गाता...
संतोष अर्श कविताएँ लिखते हैं, इधर उनके कुछ आलोचनात्मक लेखों ने भी ध्यान खींचा है.प्रसिद्ध कथाकार उदय प्रकाश की कहानियों की संरचना में विन्यस्त वैचारिकी, संवेदना और शिल्प पर विस्तार...
बटरोहीब्रिटिश शासकों को पहाड़ी क्षेत्र का वातावरण उन्हें अपने देश की याद दिलाता था. वे अस्थाई रूप से यहाँ रहने लगे. बाद में ये क्षेत्र सैलानियों की जगहें बनतीं चली...
कवियों के कवि शमशेर अपनी कविताओं की भाषा की बहुस्तरीयता और जटिल काव्यानुभवों के कारण प्रसिद्ध हैं. उनकी कविताओं पर प्रोफेसर रवि रंजन का यह आलेख आपके लिए.प्रगतिशील कविता में...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum