सहजि सहजि गुन रमैं : वीरू सोनकर
फोटो द्वारा Gordon Parksकला का अपने समय के यथार्थ से जटिल रिश्ता बनता है. कविताएँ यथार्थ नहीं बनतीं वे कुछ ऐसा करती हैं कि यथार्थ और भी यथार्थ बन जाता है,...
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फोटो द्वारा Gordon Parksकला का अपने समय के यथार्थ से जटिल रिश्ता बनता है. कविताएँ यथार्थ नहीं बनतीं वे कुछ ऐसा करती हैं कि यथार्थ और भी यथार्थ बन जाता है,...
प्रभाकर श्रोत्रिय आलोचक, निबन्धकार और संपादक थे. उनके संपादकत्व की चर्चा हुई है. ज्ञानपीठ से युवा साहित्यकारों की रचनाओं के प्रकाशन की उनकी योजना में मुझे भी प्रकाशित होने का...
Painting by Javier Alvarezसाहित्य को अपने समय के अलग-अलग चश्मों से देखा जाता है, देखा भी जाना चाहिए. ‘टेक्सट’ के इन तमाम ‘रीडिंग्स’ में साहित्य में अंतर्निहित विचारों की विवेचनाएँ...
फिल्में केवल मनोरजंन का साधन नहीं हैं, वे एक तरह से जिंदा इतिहास भी हैं.सवाल यह है कि बरतने वाला कितने वस्तुनिष्ठ ढंग से इसे निर्मित कर रहा है.फिल्मों पर...
(फोटोग्राफ : Michael Kenna)राहुल झाम्ब की कविताएँ हाथ उठाया अपने हाथ...
वरिष्ठ कवि अरुण कमल के पांच कविता संग्रह – ‘अपनी केवल धार’ (1980) ‘सबूत’(1989), ‘नये इलाके में’(1996), ‘पुतली में संसार’(2004,‘मैं वो शंख महाशंख’ (2013). तथा अंग्रेजी में समकालीन भारतीय कविता के अनुवादों...
(Photo: Courtesy Woody Gooch)बायोटेक्नोलॉजी से स्नातक, सेल्स एंड मार्केटिंग में एम.बी.ए.बैंकाक में आठ साल रहीं फिर लौट कर ड्रामेटिक्स से स्नातकोत्तर और नाटकों में अभिनय और लेखन आदि.यह दिव्या विजय हैं. और...
(पेंटिग : कैंसर ; melissa-anne-carroll)मृदुला शुक्ला का पहला कविता संग्रह \' उम्मीदों के पाँव भारी हैं \' बोधि प्रकाशन से २०१४ में प्रकाशित है. रचनात्मक लेखन में वह इधर लगातार...
समीक्षा दो लोग पढ़ते हैं – खुद समीक्षक और दूसरा वह लेखक; जिसकी (कृति) समीक्षा की गयी है. कभी-कभी संपादक या/और प्रूफ रीडर भी पढ़ लेते हैं.हिंदी में समीक्षा निचले...
पेंटिग : राजा रवि वर्माबाणभट्ट रचित कादम्बरी संस्कृत साहित्य की महानतम कृति है. उसे पहला उपन्यास भी माना गया है, मराठी भाषा में उपन्यास को कादम्बरी कहा जाता है. अतुलवीर...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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