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सहजि सहजि गुन रमैं : पंकज चतुर्वेदी की नयी कविताएँ

(पेंटिग : Salman Toor : Imaginary Multicultural Audience :2016पंकज चतुर्वेदी की कविताएँ राजनीतिक हैं, सभ्यता अब तक जहाँ पहुंची है उसके पक्ष में खड़ी हैं और उसे और विकसित होते देखने का...

परख : हिजरत से पहले और ख़यालनामा (वन्दना राग)

वंदना राग के हाल ही में प्रकाशित कहानी संग्रहों \'हिजरत से पहले\' और \'ख़यालनामा\' से गुजरते हुए  अर्पण कुमार का  उनकी कथा – संवेदना पर यह आलेख  वन्दना राग :...

सबद – भेद : अमृता प्रीतम : विमलेश शर्मा

अमृता प्रीतम (1919-2005) का लेखन बहुत विस्तृत है. उनकी कविताओं ने जहाँ पंजाबी कविताओं को पहचान दी वहीं उनके कथा लेखन में वह खुदमुख्तार स्त्री नज़र आती है जो स्त्रियों...

\’क्या हुआ जो\’ : राहुल राजेश

राहुल राजेश का दूसरा कविता संग्रह \'क्या हुआ जो\' इस वर्ष  ज्योतिपर्व प्रकाशन, दिल्ली से प्रकाशित हुआ है. इसी संग्रह से कुछ कविताएँ.राहुल राजेश कविता लिखते हुए अपने श्रोताओं को...

अभिव्यक्ति की आज़ादी और आलोचनात्मक विवेक पर जारी हमले

\"The Making of India\", Naresh Kapuria / via SAHMATदेश में उन्माद का वातावरण सकारण पैदा किया जा रहा है, जिससे कि जनता अपनी रोज़मर्रा की परेशानियों और उनके पीछे के उत्तरदायी...

सहजि सहजि गुन रमैं : प्रेमशंकर शुक्ल

भीमबैठकाभीमबैठका आवासीय पुरास्थल है, यह आदि-मनुष्यों द्वारा निर्मित शैल चित्रों के लिए प्रसिद्ध है .भारत के लिए तो यह राष्ट्रीय महत्त्व का है ही यूनेस्को ने भी इसे विश्व धरोहर...

सहजि सहजि गुन रमैं : प्रमोद पाठक

(ARTIST:ROBERTO SANTO Arco.Bronze)जो कवि यह समझते हैं कि प्रेम कविताएँ लिखना प्रेम करने के बनिस्पत कम ज़ोखिम का काम है, वे भारी गलतफहमी के शिकार हैं. कुछ सोचकर ही राइनेर मारिया रिल्के...

पिंक : तू खुद की खोज में निकल : जय कौशल

निर्माता शूजीत सरकार और निर्देशक अनिरुद्ध रॉय चौधरी की फ़िल्म ‘पिंक’ खूब पसंद की जा रही है. यह कहानी दिल्ली में किराए पर रहने वाली तीन कामकाजी लड़कियों मीनल अरोड़ा (तापसी...

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