मति का धीर : गुरदयाल सिंह
गुरदयाल सिंह राही (10 January 1933 – 16 August 2016) अमृता प्रीतम के बाद पंजाबी भाषा के ऐसे दूसरे रचनाकार हैं जिन्हें भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान प्राप्त हुआ था. उनके उपन्यासों के...
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गुरदयाल सिंह राही (10 January 1933 – 16 August 2016) अमृता प्रीतम के बाद पंजाबी भाषा के ऐसे दूसरे रचनाकार हैं जिन्हें भारतीय ज्ञानपीठ सम्मान प्राप्त हुआ था. उनके उपन्यासों के...
पेंटिग : A perfect murder: Kim Sobatशिवदान सिंह चौहान प्रगतिशील साहित्य के संस्थापक सदस्य थे. नामवर सिंह ने उनकी जमीन पर अपने प्रभाव का विस्तार किया. कैसे शिवदान सिंह की...
वसुधा डालमियाअंग्रेजी में 1997 में प्रकशित वसुधा डालमिया की पुस्तक – ‘The Nationalisation of Hindu Tradition’ का हिंदी अनुवाद ‘हिंदू परम्पराओं का राष्ट्रीयकरण’ राजकमल प्रकाशन से इस वर्ष छप कर...
निर्देशक गुरविन्दर सिंह की सिख अलगाववादी आन्दोलन की पृष्ठभूमि पर बनी पंजाबी फ़िल्म चौथी कूट (ਚੌਥੀ ਕੂਟ) अभी प्रदर्शित हुई है. यह कथाकार वरयाम सिंह संधु की दो कहानियों पर...
कविताओं पर अंतिम रूप से कुछ भी नहीं कहा जा सकता. कविताएँ अर्थ बदलती रहती हैं. हर पाठक उसमें कुछ जोड़ता है. यही नहीं समय और स्थान भी उसमें बदलाव...
‘एक और ब्रह्मांड’ ख्यात लेखक अरुण माहेश्वरी की कृति है, यह इमामी समूह के संस्थापक श्री राधेश्याम अग्रवाल के जीवन पर आधारित है. पर यह जीवनी नहीं है और इसे...
(Photo by Portia Hensley : Two homeless boys in Kathmandu) शंकरानंद के दो कविता संग्रह ‘दूसरे दिन के लिए’ और ‘पदचाप के साथ’ प्रकाशित हैं. बेघर लोगों पर आकर में छोटी...
समय जैसा है, उसे ही लिखा जाए (प्रेमचंद की 137वीं सालगिरह पर)अरुण माहेश्वरी1880 में...
अपने उपन्यास ‘मास्टर साब’ के हिंदी अनुवाद की भूमिका में महाश्वेता देवी ने लिखा है- ‘लेखकों को वहाँ और अधिक चौकस रहना पड़ता है, जहाँ अँधेरा कुंडली मारे बैठा है....
नंदकिशोर आचार्य को सुनते हुए ब्रज रत्न जोशी_____________उनके काव्यपाठ को सुनते-सुनते ही उन्हीं की एक कविता से यह सामने आया कि कैसे स्वयं कविता उन्हें बनाती है. यह...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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