मंगलाचार : संतोष अर्श (कविताएँ)
कविता भाषा की मिट्टी से गढ़ी जाती है, संतोष अर्श शब्दों के संस्कार और सरोकार दोनों से वाकिफ हैं. उन्हें कविता को आकार देना आता है. इन कविताओं को उम्मीद...
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कविता भाषा की मिट्टी से गढ़ी जाती है, संतोष अर्श शब्दों के संस्कार और सरोकार दोनों से वाकिफ हैं. उन्हें कविता को आकार देना आता है. इन कविताओं को उम्मीद...
(कश्मीर में अवंतीपुर के प्राचीन मंदिर के खंडहर की तस्वीरें : अरुण माहेश्वरी) अभिनवगुप्त मुख्यत: काश्मीरी शैव-सिद्धांत के अपने दर्शनिक ग्रन्थों के कारण प्रसिद्ध हैं. उन्होंने काव्यशास्त्र के क्षेत्र में...
तुषार धवल (जन्म: 22/8/1973, दिल्ली स्कूल आफ इकॉनामिक्स से उच्च शिक्षा) पेंटिग, फोटोग्राफी और ड्रामा में भी सक्रिय हैं. उन्होंने दिलीप चित्रे की कविताओं का हिंदी में अनुवाद किया है. ‘पहर...
( young Korean dancer Eunhye Jang)लेखक आलोचक कर्ण सिंह चौहान का मानना है कि – “किताबें और आलेख वगैरह वक्त के मुकाम पर मैंने लिखे जरूर हैं, लेकिन उनका अपना...
(फ़िल्म सैराट के एक दृश्य में अभिनेत्री रिंकू राजगुरु) सैराट को लेकर समालोचन पर बहुत कुछ विवेचित हो चुका है. इस पर संवाद के समापन की घोषणा के बाद भी प्रतिक्रियाओं का...
(From Drama ‘Teesri Kasam’ Directed by:- RAJESH NATH RAM)युवा राकेश दुबे हिंदी में कथाकार के रूप में रचनाशील हैं. यह कहानी उन्हें एक मजबूत पहचान देती है.देशज पृष्ठभूमि में आकर...
पेंटिग : Arun Samadder (द्रौपदी)आज आपका परिचय वर्षा सिंह की कविताओं से कराते हैं. स्त्री – जीवन के यथार्थ की सहज अनुभूति और समझ से बुनी इन कविताओं में संभावनाएं हैं....
शाहिद कपूर नीतू तिवारी ‘डॉक्युमेंट्री सिनेमा’ पर दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएच.डी. कर रही हैं, सिनेमा पर लिखती हैं. फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ पर उनका यह आलेख इस फ़िल्म को लेकर सोशल नेटवर्क...
Olaf Brzeski ( Dream - Spontaneous combustion) courtesy of the Czarna Gallerअज्ञेय का मानना था कि “काव्य के जो भी गुण बताए जाते या बताए जा सकते हैं, अंततोगत्वा भाषा के...
पेंटिग : rachel crossकविताओं की जटिलता को समझने से बचने का सुविधाजनक तरीका है उन्हें वर्गीकृत कर लेना. जैसे ही आप कुछ कविताओं को ‘स्त्री –चेतना’ या ‘दलित – चेतना’ या ‘जनवादी’...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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