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सहजि सहजि गुन रमैं : विशाल श्रीवास्तव

‘पीली रोशनी से भरा काग़ज़’ विशाल श्रीवास्तव  का पहला कविता संग्रह है जिसे साहित्य अकादेमी ने ‘नवोदय योजना के अंतर्गत ’प्रकाशित किया है. विशाल की कविताएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रशंसित होती...

मति का धीर : मुद्राराक्षस

हिंदी के मौलिक चिंतक, कथाकार, नाटककार, आलोचक और समय- संस्कृति के अप्रतिम व्याख्याकार मुद्राराक्षस अपने आप में एक संस्था थे. वर्चस्व की संस्कृति, विचार और समाज के समानांतर उनकी आवाज़...

परिप्रेक्ष्य : कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार

फ़ोटो क्रेडिट  :    रूलान्ड फ़ोसेन,अम्स्तर्दम     जब विष्णु खरे को इस वर्ष का प्रतिष्ठित ‘कुसुमाग्रज राष्ट्रीय पुरस्कार’ दिया गया तब मराठी के महत्वपूर्ण कवि प्रफुल्ल शिलेदार ने गम्भीरता से...

परख : अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंग (राजीव रंजन गिरि)

अथ-साहित्य : पाठ और प्रसंगराजीव रंजन गिरिप्रकाशक : अनुज्ञा बुक्स, 1/10206 वेस्ट गोरख पार्कशाहदरा, दिल्ली – 110032 मूल्य : 750/- रुपये  पृष्ठ 391साहित्य के  आयाम          ...

निज घर : मृत्यु के बाद कहानी मुझे रचेगी : प्रियंवद

‘रचना समय’ का कहानी विशेषांक (दो भागों में) अभी प्रकाशित हुआ है. संपादक हरि भटनागर और इस विशेषांक के अतिथि संपादक राकेश बिहारी का श्रम और सुरुचि दिखती है. कथाकारों,...

सैराट – संवाद : (८) : सैराट की जमीन : सारंग उपाध्याय

अंतरजातीय विवाह  भारतीय समाज का वह लिटमस पेपर है जिससे आप जातिवाद के ज़हर का पता लगा सकते हैं. यह अकारण नहीं है कि ऐसे विवाह बमुश्किल पांच प्रतिशत भी...

सैराट – संवाद (७) : कवि नागराज मंजुले और फ़िल्म

मराठी फ़िल्म ‘सैराट’ की चर्चा हिंदी में समालोचन से आगे बढती हुई टीवी के प्राइम शो तक पहुंच चुकी है. कुछ दिन पहले एनडीटीवी में मशहूर पत्रकार रवीश कुमार ने...

परख : मल्यों की डार : गीता गैरोला

‘तभी तो इतनी मुश्किल परिस्थितियों में भी जिंदा रह पाती हैं पहाड़ी औरतें, पेड़ पौधों की हरियाली, फूलों का रंग, और बास सब औरतों के गाये गीतों से ही बनते...

परख : रेत-रेत लहू (जाबिर हुसेन)

रेत-रेत लहू (कविता-संग्रह) जाबिर हुसेनप्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, 1-बी, नेताजी सुभाष मार्ग, नई दिल्ली-110002रेत-रेत लहू (जाबिर हुसेन) रेत पर घटित होते हमारे समय की कविताएँ             शहंशाह आलमयह समय...

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