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हस्तक्षेप : श्री श्री रविशंकर और नोबेल पुरस्कार : संजय जोठे

श्री श्री रविशंकर फिर चर्चा में हैं कि उनके अनुसार मलाला नोबल की हकदार नहीं थी और उन्होंने तो इसे ठुकरा ही दिया था.  धार्मिक गुरुओं के साथ तमाम समस्याएँ...

सहजि सहजि गुन रमैं : मलखान सिंह

फोटो द्वारा अरुण देवआखिर कविता है क्या ? अगर वह बेचैन न करे, सोचने पर विवश न करे, कम से कम आपकी भाषा में वह कुछ जोड़े नहीं, आपके सौन्दर्यबोध...

कथा – गाथा : अहिल्या : जयश्री रॉय

पेंटिग : Pradeep Kanikअहिल्या के मिथ का अगर आप पुर्नपाठ करें तो वह पति, प्रेमी और अपने खुद के ‘अपराध बोध’ से बाहर निकलने में मदद करते विचारक मित्र के बीच...

मंगलाचार : अनामिका शर्मा

पेंटिग :emma-uberएक बिलकुल नई पीढ़ी, हिंदी कविता को अपने तरीके से लिखती हुई.  भाव, भाषा और शिल्प में अलग. अनामिका की कविताएँ पढ़ें और अपनी राय भी दें.अनामिका शर्मा की...

सहजि सहजि गुन रमैं : सुशील कुमार

पेंटिग : Avishek Sen(OH GOD I\'M AFRAID TO CRY)सुशील कुमार के तीन कविता संग्रह प्रकाशित हैं, वे अपनी कविताओं में ऐसे काव्य-पुरुष को लाते हैं जो तमाम घात – प्रतिघात के...

सहजि सहजि गुन रमैं : अनिल करमेले

पेंटिग : Vanity by Elena caronआज जबकि कलाकारों से विचारहीनता की मांग की जा रही है और उनके मूल्यांकन में इसे एक निर्णायक तत्व के रूप में देखा जा रहा है, अनिल...

सहजि सहजि गुन रमैं : पंकज चतुर्वेदी

Picasso\'s Guernicaकविता अपने समय के सवालों से जूझती है. वह विकट, जटिल, बदलते और निहित प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष खतरों को भी देखती है. मनुष्य विरोधी मानसिकता का प्रतिपक्ष सदैव उसके पास रहता...

सहजि सहजि गुन रमैं : मिथिलेश श्रीवास्तव

मिथिलेश श्रीवास्तव सुकवि ही नहीं साहित्य के कर्मठ कार्यकर्ता भी हैं. ‘डायलाग’ के माध्यम से वह लगातार साहित्यिक-वैचारिक कार्यक्रमों में संलग्न हैं. मिथिलेश की कविताएँ एक ख़ास किस्म से ठोस...

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