हस्तक्षेप : श्री श्री रविशंकर और नोबेल पुरस्कार : संजय जोठे
श्री श्री रविशंकर फिर चर्चा में हैं कि उनके अनुसार मलाला नोबल की हकदार नहीं थी और उन्होंने तो इसे ठुकरा ही दिया था. धार्मिक गुरुओं के साथ तमाम समस्याएँ...
Home » Uncategorized » Page 31
श्री श्री रविशंकर फिर चर्चा में हैं कि उनके अनुसार मलाला नोबल की हकदार नहीं थी और उन्होंने तो इसे ठुकरा ही दिया था. धार्मिक गुरुओं के साथ तमाम समस्याएँ...
फोटो द्वारा अरुण देवआखिर कविता है क्या ? अगर वह बेचैन न करे, सोचने पर विवश न करे, कम से कम आपकी भाषा में वह कुछ जोड़े नहीं, आपके सौन्दर्यबोध...
इटली के मशहूर पेंटर Girolamo Francesco Maria Mazzola अपने शहर parma के नाम पर पर्मिजियनिनो के नाम से जाने जाते हैं. उनके आत्म चित्र \'Self-portrait in a Convex Mirror\' पर...
पेंटिग : Pradeep Kanikअहिल्या के मिथ का अगर आप पुर्नपाठ करें तो वह पति, प्रेमी और अपने खुद के ‘अपराध बोध’ से बाहर निकलने में मदद करते विचारक मित्र के बीच...
युवा राहुल देव व्यंग्य लिख रहे हैं. यह काम कितनी संजीदगी से किया जाता है इसे जानना हो तो हरिशंकर परसाई और शरद जोशी को पढना चाहिए. चुटकी लेने और...
पेंटिग :emma-uberएक बिलकुल नई पीढ़ी, हिंदी कविता को अपने तरीके से लिखती हुई. भाव, भाषा और शिल्प में अलग. अनामिका की कविताएँ पढ़ें और अपनी राय भी दें.अनामिका शर्मा की...
पेंटिग : Avishek Sen(OH GOD I\'M AFRAID TO CRY)सुशील कुमार के तीन कविता संग्रह प्रकाशित हैं, वे अपनी कविताओं में ऐसे काव्य-पुरुष को लाते हैं जो तमाम घात – प्रतिघात के...
पेंटिग : Vanity by Elena caronआज जबकि कलाकारों से विचारहीनता की मांग की जा रही है और उनके मूल्यांकन में इसे एक निर्णायक तत्व के रूप में देखा जा रहा है, अनिल...
Picasso\'s Guernicaकविता अपने समय के सवालों से जूझती है. वह विकट, जटिल, बदलते और निहित प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष खतरों को भी देखती है. मनुष्य विरोधी मानसिकता का प्रतिपक्ष सदैव उसके पास रहता...
मिथिलेश श्रीवास्तव सुकवि ही नहीं साहित्य के कर्मठ कार्यकर्ता भी हैं. ‘डायलाग’ के माध्यम से वह लगातार साहित्यिक-वैचारिक कार्यक्रमों में संलग्न हैं. मिथिलेश की कविताएँ एक ख़ास किस्म से ठोस...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum