मैं कहता आँखिन देखी : मनीष गुप्ता
मनीष गुप्ता आज साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में ‘हिंदी कविता’ के YouTube चैनल के कारण जाने, पहचाने और माने जा रहे हैं. इसमें हिंदी-उर्दू के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ के साहित्य का...
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मनीष गुप्ता आज साहित्यिक-सांस्कृतिक क्षेत्रों में ‘हिंदी कविता’ के YouTube चैनल के कारण जाने, पहचाने और माने जा रहे हैं. इसमें हिंदी-उर्दू के साथ-साथ अन्य भारतीय भाषाओँ के साहित्य का...
बशीर फारुक का एक शेर है - मिरी नमाज़ मिरी बंदगी मिरा इमांlतिरा ख्याल तिरी याद आरज़ू तेरीllइस देश में तमाम तरह की आस्थाओं के साथ हजारों सालों से लोग...
Add captionख्यात कथाकार – उपन्यासकार बटरोही का उपन्यास, ‘गर्भगृह में नैनीताल’ २०१२ में प्रकाशित हुआ था. इस उपन्यास का यह हिस्सा आश्चर्यजनक ढंग से उत्तराखंड के वर्तमान राजनीतिक संकट पर...
ll विश्व कविता दिवस ll की शुभकामनाओं के साथ नरेन्द्र पुण्डरीक की इन कविताओं में हमारे समाज का वह चेहरा दिखता है जिसे अब हिंदी के कवि कहना नहीं चाहते. मध्यवर्गीय आभिजात्य...
कुबेर दत्त हिंदी के कवि और दूरदर्शन के साहित्यिक-वैचारिक कार्यक्रमों के प्रसिद्ध प्रस्तोता थे. आचार्य किशोरी दास वाजपेयी, प्रेमचंद और डा. रामविलास शर्मा पर उनके बनाये वृत्त चित्र आज भी...
समीक्षाहम न मरब : जीने और मरने के बीच फैला जीवन का महाआख्यान : विवेक मिश्ररचनाएं मनुष्यता में शौर्य का संधान करती हैं. जिजीविषा को जगाती हैं. वे कहीं-कहीं ‘फीनिक्स’ पक्षी की तरह-विनाश...
पेंटिग : Rekha Rodwittiya (MATTERS OF THE HEART )मोनिका कुमार कम लिखती हैं और अक्सर उनकी कविताएँ शीर्षक विहीन होती हैं हालाँकि शीर्षक का होना या न होना कोई गुण या दोष...
भारत विश्व में अपने मोक्ष, पुनर्जन्म आदि दार्शनिक मान्यताओं के कारण भी जाना जाता है. हजारो विकल प्राणी मोक्ष की तलाश में तमाम गुरुओं के पास भटकते रहते हैं. जनता...
पेंटिग : Roman Maresप्रमोद पाठक को कुछ दिन पहले आपने समालोचन में पढ़ा, उन्हें भरपूर सराहना भी मिली, उनकी कविताओं में कथ्य की ताज़गी और प्रवाह को रेखांकित किया गया था....
समीक्षा एक अकेली औरत की दुनिया सूरज प्रकाशरजनी मोरवाल का सामयिक प्रकाशन से छपा पहला कहानी संग्रह ‘कुछ तो बाकी है’...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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