अम्बर्तो इको : विजय कुमार
This is Not the End of the Book’ डिजिटल संचार के इस दौर में किताबों के भूत, भविष्य और वतर्मान पर ‘अम्बर्तो इको’, ज्यां क्लाउदे कैरिएयर’ तथा ‘ज्यां फिलिप डे...
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This is Not the End of the Book’ डिजिटल संचार के इस दौर में किताबों के भूत, भविष्य और वतर्मान पर ‘अम्बर्तो इको’, ज्यां क्लाउदे कैरिएयर’ तथा ‘ज्यां फिलिप डे...
पेंटिग : Imran Hossain Pipluलंबी कविताचौबारे पर ए का ला पअनूप सेठी मैं इस मचान पर खड़ा हूं चीरें फाड़ें तो लकड़ी का फट्टा ठस्स नट इतराए तो सीढ़ी...
कवि और गीतकार प्रेमशंकर रघुवंशी (8 जनवरी 1936-21 फरवरी 2016) की स्मृतियों और उनकी कविताओं से बुना गया यह शोक-आलेख व्यक्ति और साहित्यकार के रूप में प्रेमशंकर रघुवंशी को प्रत्यक्ष...
लवली गोस्वामीलवली गोस्वामी दर्शन और मनोविज्ञान की अध्येता हैं. सामाजिक मुद्दों पर सक्रिय हैं. भरतीय मिथकों पर उनकी पुस्तक ‘प्राचीन भारत में मातृसत्ता और यौनिकता’ प्रकाशित है. कविताएँ लिखती हैं....
बीसवीं शताब्दी के आखिरी दशकों से अपनी काव्य-यात्रा शुरू करने वाले कवियों पर सम्यक आलोचना का अभाव है. कवि शहंशाह आलम के पांच कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उन्हें पहचाना जाता...
बसंत है और इजहारे मोहब्बत का चलन भी. जश्ने–बसंत और बसंत-उत्सव नाम से इसे मनाने की लम्बी परम्परा भी है. आइये प्रेम की धीमी आग में सुलगती युवा कवयित्री विशाखा...
ललिता यादव की कहानी ‘नताशा करेगी विवाह भी’ पश्चिमी उत्तर–प्रदेश की पृष्ठभूमि में विकसित प्रेमकथा है जो प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे पुलिस महकमे को आधार बनाकर लिखी गयी है. इसमें...
उम्मीद (कविता संग्रह)साहित्य भंडार , इलाहबाद.प्रथम संस्करण 2015 अंगूठा भर हैं नन्हे मियाँ देवेन्द्र आर्यएक कहावत है- ’उम्मीद से’, पेट से होने (गर्भवती) होने के अर्थ में....
पूनम शुक्ला का एक कविता संग्रह, ‘सूरज के बीज’ प्रकाशित है. हिंदी की अनेक पत्र-पत्रिकाओं में उनकी कविताएँ प्रकाशित हैं, हो रही हैं. आज उनकी कुछ कविताएँ समालोचन में भी...
पंकज सिंह पत्रकार, प्रतिबद्ध एक्टिविस्ट और हिंदी के कवि थे, उनके तीन कविता संग्रह \'\'आहटें आसपास\'\' \'\'जैसे पवन पानी\'\' और \'\'नही\'\' प्रकाशित हैं. उनके असमय अवसान ने हिंदी जगत को...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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