बात – बेबात : स्मार्ट सिटी : संजय जोठे
संजय जोठे युवा समाजशास्त्री हैं. धीर-गम्भीर विषयों पर उतनी ही गंभीरता से लिखते हैं. पर उनके अंदर एक व्यंग्यकार भी है, इसका पता मुझे भी नहीं था. प्रस्तावित भारतीय स्मार्ट...
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संजय जोठे युवा समाजशास्त्री हैं. धीर-गम्भीर विषयों पर उतनी ही गंभीरता से लिखते हैं. पर उनके अंदर एक व्यंग्यकार भी है, इसका पता मुझे भी नहीं था. प्रस्तावित भारतीय स्मार्ट...
वाणी प्रकाशन से इस वर्ष चर्चित कथाकार जयश्री रॉय का उपन्यास दर्दजा प्रकाशित हुआ है. इस उपन्यास का एक अंश और साथ में अभयकुमार दुबे (सीएसडीएस)) की टिप्पणी ख़ास आपके...
शायर शकेब जलाली उत्तर-प्रदेश के बदायूं के रहने वाले थे, विभाजन में पाकिस्तान चले गए जहाँ १९६४ में उन्होंने आत्महत्या कर ली. उनका एक शेर है – काँटों की बाड़...
हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के ‘सायंस टेक्नोलॉजी एंड सोसायटी स्टडीज\' के पीएच.डी. छात्र रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी ने समाज, छात्र-राजनीति और शिक्षा-तन्त्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विश्वविध्यालयों की स्थापना के...
पेंटिग : Bernardo Siciliano (HOME)नीवन नीर चंडीगढ़ में रहते हैं. कविता लिखते हैं, सुनाते हैं. साहित्यिक आयोजनों की मेजबानी में वर्षों से सक्रिय हैं. कई संकलन प्रकाशित हुए हैं. नवीनतम बोधि प्रकाशन से...
कवि मान बहादुर सिंह पर समालोचन में ही प्रकाशित अखिलेशके संस्मरण पर विष्णु खरे ने कुछ सवाल उठायें हैं. अपना पक्ष रखते हुए अखिलेश और फिर विष्णु खरे. विष्णु खरे...
24 जुलाई 1997 को सुल्तानपुर में कवि मानबहादुर सिंह की नृशंस हत्या ने सबको विचलित कर दिया था. गांवों – कस्बों और सुदूर अंचलों में साहित्यकार अदृश्य रहते हुए कई...
Wooden Human Figures : Peter Demetzआज आपका परिचय कवि प्रमोद पाठक से कराते हैं, वे बच्चों के लिए भी लिखते हैं. उनकी लिखी बच्चों की कहानियों की कुछ किताबें बच्चों...
हिंदी कविता की दुनिया अथाह है, शायद ही ऐसा कोई शहर-नगर हों जहाँ कवि न रहते हों, कविता न लिखी सुनी जाती हो. औसत के असीम में कविताओं के शिखर...
रत्नागिरी की सुहानी शिन्दे का तकिया कलाम है – ‘पकड़ कर चलो तो’. एक साथ हाथ पकड़कर चलने से ही संघर्ष में सफलता मिलती है यह उसे उसके पिता ने...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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