मंगलाचार : लोकमित्र गौतम
लोकमित्र गौतम का पहला कविता संग्रह मैं अपने साथ बहुत कुछ लेकर जाऊँगा .. प्रकाशित हुआ है.गौतम की कवितायेँ आकार में अपेक्षाकृत बड़ी है. लम्बी कविताओं को साधना मुश्किल काव्य-कला...
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लोकमित्र गौतम का पहला कविता संग्रह मैं अपने साथ बहुत कुछ लेकर जाऊँगा .. प्रकाशित हुआ है.गौतम की कवितायेँ आकार में अपेक्षाकृत बड़ी है. लम्बी कविताओं को साधना मुश्किल काव्य-कला...
अरविन्द कुमार के व्यंग्य लेखन ने पत्र-पत्रिकाओं के माध्यम से ध्यान खींचा है. उनका पहला व्यंग्य संग्रह- ‘राजनीतिक किराना स्टोर’ शीघ्र प्रकाश्य है. अगर मैं भैंस, तो बाकी सब क्या...
कहानी कायांतर जयश्री रॉयफूलमती को ललिता ने पहली बार सिया सुंदरी के दक्खिन घाट पर देखा था. गौने के बाद बिगेसर के पीछे-पीछे बजरे से उतरते...
प्रतिमा तिवारी की कवितायेँ प्रतिमा तिवारी (इलाहबाद (उत्तर-प्रदेश) की कवितायेँ ध्यान खींचती हैं. शिल्प पर उनकी अच्छी पकड़ है. कविताओं में विविधता है. एक खुदमुख्तार और खुद्दार स्त्री...
निर्माता अनुष्का शर्मा की पहली फ़िल्म एनएच -१० चर्चा में है. इसमें खुद अनुष्का ने भी अभिनय किया है. इसके निर्देशक नवदीप सिंह ने इस फ़िल्म में जोखिम भरे प्रयोग...
भक्तिकाल की कवयित्री मीरा बाई का वैवाहिक जीवन साहित्य और इतिहास में बहुत ही विवादित है. सबसे अधिक जनश्रुतियाँ और मिथ उनके वैवाहिक जीवन को लेकर ही गढ़े गए हैं....
प्रदीप मिश्र (१९७०, गोरखपुर) वैज्ञानिक हैं. ‘अन्तरिक्ष नगर’ नाम से उनका एक विज्ञान- उपन्यास भी प्रकाशित है. बतौर कवि के रूप में भी पहचाने जाते हैं. ‘उम्मीद’ उनका दूसरा कविता...
सलाम/ श्रद्धांजलि \'कुशल संगठन कर्ता और वाम सांस्कृतिक आंदोलन के योद्धा थे जितेंद्र रघुवंशी\'जन संस्कृति मंचआगरा : 8 मार्च 2015अभी लोगों के शरीर से होली का रंग...
परम्परा और संस्कृति में बहुत सी ऐसी चीजें होती हैं जो समय को देखते हुए अपना स्वरूप बदलती है. इसे ही परम्परा की आधुनिकता कहते हैं. स्मृतिविहीन किसी भी संस्कृति...
तितास एक्टि नदीर नाम’ बांग्ला भाषा के अद्वैत मल्लबर्मन का उपन्यास है. इस ऐतिहासिक महत्व के उपन्यास का हिन्दी अनुवाद- ‘तितास एक नदी का नाम’. मानव प्रकाशन, कोलकाता से प्रकाशित...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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