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कथा – गाथा : हरिओम (दास्तान-ए-शहादत)

हरिओम कथाकार के रूप में चर्चित हैं उनका एक कहानी संग्रह ‘अमरीका मेरी जान’ प्रकाशित है. प्रस्तुत कहानी में वह नक्सल-आदिवासी ज़िला मिर्ज़ापुर में तैनात सब इन्स्पेक्टर रनबहादुर की हत्या...

मंगलाचार : सुलोचना वर्मा

सुलोचना वर्मा  की कविताएँ  उन दिनों             नहीं उगे थे मेरे दूध के दांत उन दिनों फिर भी समझ लेती थी माँ मेरी हर एक मूक...

सबद – भेद : 1857 और दस्तंबू : पंकज पराशर

1857 का संघर्ष न केवल इतिहास के लिए बल्कि साहित्य के लिए भी एक चुनौती है. इतिहास में जहाँ इसके महत्व को कम करके इसे स्थानीय विद्रोह के रूप में...

कथा – गाथा : पानी : मनोज कुमार पाण्डेय

भूमंडलोत्तर कहानी विवेचना की श्रृंखला में आलोचक राकेश बिहारी ने  मनोज पाण्डेय की कहानी पानी को परखा है. पानी में कितना यथार्थ  है कितनी कल्पना यह इतना महत्वपूर्ण नही है...

परिप्रेक्ष्य : साहित्यकार और गणतंत्र : ओम निश्चल

कभी रघुवीर सहाय ने लिखा था ‘राष्ट्रगीत में भला कौन वहभारत भाग्य- विधाता हैफटा सुथन्ना पहने जिसकागुन हरचरना गाता है.’आज हम ६६ वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं. आज हिंदी...

रंग – राग : अवधेश मिश्र (पेंटिग)

समालोचन कलाओं का साझा घर है. साहित्य के साथ-साथ पेंटिग, फ़िल्म और संगीत पर भी आप सामग्री यहाँ पढ़ते हैं. चित्रकार रामकुमार के साथ पीयूष दईया की बातचीत आपने पढ़ी...

सहजि सहजि गुन रमैं : प्रभात

 प्रभात हिंदी कविता की नई रचनाधर्मिता की पहचान हैं. हिंदी कविता को वे फिर सादगी और मासूम संवेदनाओं के पास ले आये हैं. उनकी कविताओं में पर्यावरण की वापसी हुई...

कथा – गाथा : भुजाएँ (हृषीकेश सुलभ)

कलाकृति : Adeel uz Zafarहृषीकेश सुलभ  की इस कहानी में मध्यवर्गीय जीवन की वह संरचना विन्यस्त है जो अक्सर धीमी आवाज़ में कान के पास कही जाता है. कहानी में वातावरण...

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