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सबद भेद : राज-भाषा हिंदी : राहुल राजेश

पहला विश्व हिन्दी सम्मेलन १० जनवरी से १४ जनवरी १९७५ तक नागपुर में आयोजित किया गया था. १० जनवरी को अब अंतर्राष्ट्रीय हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है....

रंग – राग : कुंवर रवीन्द्र

कुंवर रवीन्द्र  जन चित्रकार हैं सिर्फ इसलिए नहीं कि उनके चित्रों के विषय आम जन के सरोकारों से जुड़े हैं बल्कि इसलिए भी कि उन्होंने आम जन के लिए चित्र...

परिप्रेक्ष्य : २०१४ के किताबों की दुनिया : ओम निश्चल

हिंदी साहित्य और पुस्तकों का संसार विस्तृत और विविध है. हज़ारों की संख्या में प्रकाशक हैं जहाँ से वर्ष भर लाखों किताबें प्रकाशित होती हैं. उनमें से साहित्य के लिए...

मंगलाचार : अरविन्द कुमार

कलाकृति : Abdullah M. I. Syedअरविन्द कुमार की कुछ कवितायेँ __________बच्चीबच्ची अबठुमक-ठुमक कर चलने लगी हैघर-आँगन, कोना-कोना, पड़ोसगुलज़ार हो गया हैबच्ची अब....बच्ची अबचार दांतों से खिलखिलाने लगी हैमाँगने लगी है---दुद्धू, ताय, तेला...

कथा – गाथा : लडकियाँ मछलियाँ नही होतीं (प्रज्ञा पाण्डेय)

(जुर्रत से साभार)कहानी  लड़कियाँ मछलियाँ नहीं होतीं                   प्रज्ञा पाण्डेयउसने  एक  पुरानी डायरी में  वक़्त की  किसी  तारीख से   हारकर ऐसा लिखा था....

सबद भेद : समकालीन कविता : राहुल राजेश

पेंटिंग : के. रवीन्द्र हिंदी कविता के लोकतंत्र में तरह तरह के कवि और काव्य प्रवृतियाँ सक्रिय हैं. असल और नकल  के कई असली नकली संघर्ष हैं. नवीन और पुरातन की...

हस्तक्षेप : मेरे बच्चे.

पेशावर में तालिबानों द्वारा मासूम बच्चों के कत्ले-आम से पूरी दुनिया कराह उठी है, सिसक रही है. बच्चे किसी देश, किसी कौम के नहीं होते वे तो मनुष्यता के भविष्य...

कथा – गाथा : हृषीकेष सुलभ

पेंटिग के.रवीन्द्रवरिष्ठ रंगकर्मी और कथाकार हृषीकेष सुलभ का नया कहनी संग्रह ‘हलंत’ राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. ‘द्रुत विलम्बित’ इसी संग्रह की मार्मिक कहानी है जो अंत तक पहुँचते...

सहजि सहजि गुन रमैं : परमेश्वर फुंकवाल

पेंटिग कुंवर रवीन्द्रपरमेश्वर फुंकवाल गीतात्मक संवेदना के कवि हैं. लगाव के बिसरे भूले-क्षण और अलगाव की चुभती- टीसती यादें उनकी कविताओं में जब तब उभर आती हैं. एक कविता रेल...

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