सबद – भेद : सात कवियों के उपन्यास : अविनाश मिश्र
नामवर सिंह ने उदय प्रकाश के संदर्भ में एक बार यह कहा था कि कवि अच्छे कथाकार हो सकते हैं. भाषा की सृजनात्मकता उनके ध्यान में रही होगी जो कवियों...
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नामवर सिंह ने उदय प्रकाश के संदर्भ में एक बार यह कहा था कि कवि अच्छे कथाकार हो सकते हैं. भाषा की सृजनात्मकता उनके ध्यान में रही होगी जो कवियों...
(Dimple Kapadia puts on makeup as she gets ready to shoot for \'Zooni\'. A Kashmiri crowd, of mostly teenagers, looks on. 1989)‘ज़ून, ज़ाफरान और चांद की रात’ कहानी के नेपथ्य...
काफ़ेर बिजूका उर्फ़ इब्लीस (कहानी संग्रह)कहानीकार : सत्यनारायण पटेलप्रकाशक :आधार प्रकाशन, पंचकुला, हरियाणाप्रथम संस्करण: २०१४/पृष्ठ संख्या: १३५मूल्य: २०० रुपएसत्यनारायण पटेल के तीसरे कहानी-संग्रह ‘काफ़िर बिजूका उर्फ़ इब्लीस’ की समीक्षा विजय...
वैसे तो समकालीन हिंदी कविता ने छंद और तुक को अपनी दुनिया से लगभग बाहर ही कर दिया है, पर रामजी तिवारी जैसा सचेत कवि जब इस तुक को मध्यवर्गीय...
पेंटिग : जगन्नाथ पंडासमकालीन कहानियों पर एकाग्र श्रृंखला, \'भूमंडलोत्तर कहानी \'में युवा आलोचक राकेश बिहारी किसी चुनी हुई कहानी के माध्यम से उस कहानी और कहानी में अभिव्यक्त यथार्थ की विवेचना...
चित्र गूगल से आभार सहित गंज बासौदा (म.प्र.) के रहने वाले हिंदी के कवि मणि मोहन के कविता संग्रह \"शायद\" को इस वर्ष के म.प्र. हिंदी साहित्य सम्मेलन के वागीश्वरी पुरस्कार के लिए चुना...
आभार के साथ- Alfred Degensयुवा कथाकार कविता की यह दिलचस्प कहानी पहले तो आपको पढने के लिए मजबूर करती है फिर रेडियो और एफ. एम. की दुनिया की आवाज़ों के...
Nitin Mukul-REALM OF THE SENSESनासिख के शिष्य ‘आग़ा- कल्लब हुसैन खां’ का एक शेर हैलोग कहते हैं कि फन्ने शायरी मनहूस हैशेर कहते कहते मैं डिप्टी कलक्टर हो गया.डॉ. हरिओम...
बहादुर पटेल जीवन से संलग्नता के सजीव, संवेनशील और सक्षम कवि हैं. उनमें एक खुरदरापन और जीवटता है जो आत्माभिमान से आलोकित है. जब वह कहते हैं –‘ और हम...
यह कहानी फिल्मों की दुनिया में संघर्ष कर रहे चार युवाओं – मिनर्वा, अंजुम, रफीक और अदृश्य ‘चौथे लडके’ की कहानी है जो दरअसल हर \'असफल\' युवा की कहानी है....
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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