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सबद – भेद : स्थानीयता-बोध : सतीश जायसवाल

Akbar riding the elephant Hawa\'I pursuing another elephantसतीश जायसवाल वरिष्ठ कथाकार – संपादक हैं. रचना में स्थानीयता और सार्वभौमिकता को लेकर लम्बी  बहसें चली हैं. यह आलेख असरदार तरीके से इस...

मंगलाचार : दर्पण साह

पिथौडागढ़ (उत्तराखण्ड) के दर्पण साह (जन्म : 3-09-1981) की कविताएँ देखें. लोकल और ग्लोबल के बीच हमारी युवा पीढ़ी की सहज आवाजाही है. इन युवा कविताओं में हिंदी कविता का नया मुहावरा...

बात – बेबात : कवि जी : राहुल देव

एक सीधे -सादे नागरिक से जब स्थानीय \'महाकवि\' मिलता है तब उसकी क्या दशा (दुर्दशा) होती है ?उम्मीद (आशंका) है  कि ऐसे महाकवि आपके नगर- कस्बे में भी होगे -...

मंगलाचार : गौतम राजरिशी

ग़ज़ल कविता का ऐसा ढांचा है जो ब-रास्ते फारसी से होते हुए दुनिया की अधिकतर भाषाओँ में मकबूल है. हिंदी को यह तोहफा उर्दूं की सोहबत से हासिल है या...

रंग – राग : हैदर : सारंग उपाध्याय

सिनेमा के दर्शक सार्थक फिल्मों की हिंदी की  मुख्य धारा के फ़िल्म-उद्योग से उम्मीद रखते हैं. कभी-कभी कुछ फिल्में ऐसी बनती हैं जो प्रबुद्ध दर्शकों और समीक्षकों का ध्यान अपनी...

परिप्रेक्ष्य : पैट्रिक मोदियानो से हेलेन हेर्नमार्क की बातचीत

\" मैं 45 साल से एक ही किताब को रुक-रुक कर लिख रहा हूँ..\"   पैट्रिक मोदियानो(2014 के साहित्य के नोबेल पुरस्कार की घोषणा के बाद, फ्रांसीसी भाषा के उपन्यासकार पैट्रिक मोदियानो से नोबेल...

कथा – गाथा : मनोज कुमार पाण्डेय

कालजयी फ़िल्म the bicycle Thief का  एक दृश्ययुवा कथाकार मनोज कुमार पाण्डेय की कहानी – ‘चोरी’, छोटे –छोटे विवरणों शुरू से होकर बड़ी विडम्बनाओं तक पहुंचती है.  बचपन की मासूम...

सहजि सहजि गुन रमैं : शिरीष कुमार मौर्य

रात नही कटती? लम्बी यह बेहद लम्बी लगती है ?इसी रात में दस-दस बारी मरना है जीना हैइसी रात में खोना-पाना-सोना-सीना है.ज़ख्म इसी में फिर-फिर कितने खुलते जाने हैंकभी मिलें...

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