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मंगलाचार : महाभूत चन्दन राय

पेंटिंग : Mahesh Balasubramanianमहाभूत चन्दन राय (1981, वैशाली, बिहार) पेशे से केमिकल इंजीनियर हैं और कविताएँ लिखते हैं. किसी युवा में जिस तरह के ‘एंटी – स्टेबलिसमेंट’ की हम उम्मीद करते...

परख : पंचकन्या (मनीषा कुलश्रेष्ठ ) : विवेक मिश्र

सामयिक प्रकाशन, जटवाडा दरियागंज नई दिल्ली -110002कीमत 395 रुपएसतीत्व और मातृत्व से मुक्त-स्त्री की सृजनशीलता : पंचकन्याविवेक मिश्र\'शिगाफ़\' और \'शालभंजिका\' जैसे उपन्यासों के बाद मनीषा कुलश्रेष्ठ का नया उपन्यास\'पंचकन्या\' कई...

निज – घर : जापान डायरी : प्रत्यक्षा

संवेदना के भी कई स्तर हैं. स्पर्श, शब्द, रंग और राग उसके कुछ आयामों का अहसास   कराते हैं. अक्सर चित्रकारों ने संवेदनशील लेखन किया है. प्रत्यक्षा युवा कथाकार – कवयित्री...

सहजि सहजि गन रमैं : तुषार धवल

तुषार धवल की लम्बी कविता ‘दमयंती का बयान’                ____________________________________________________दमयंती का बयान मृत्युओं के लिये एक जगह रख छोड़ा है हमने बाकी हिस्से में...

परख : जिद्दी रेडियो : पंकज मित्र

जिद्दी रेडियो : पंकज मित्र (कहानी संग्रह) राजकमल प्रकाशन, नयी दिल्लीपृष्ठ संख्या - 131 / मूल्य 250 रुपयेसमय का सच और सामर्थ्य की सीमा: राकेश बिहारी पिछले पंद्रह-बीस वर्षों में कथाकारों की जो नई पीढ़ी आई है,...

परख : उपसंहार : काशीनाथ सिंह

ऐश्वर्य की मियाद                 पल्लव\'आखिर ईश्वर है क्या ? मनुष्य के श्रेष्ठतम का प्रकाश ही तो? और यह प्रकाश प्रत्येक मनुष्य के भीतर होता...

कथा – गाथा : शमोएल अहमद

वैवाहिक जीवन के उतार - चढ़ाव की दिलचस्प कहानीकायाकल्प               शमोएल अहमद  उसकी बीवी पहले गुस्ल करती थी .....और ये बात उसको हमेशा ही अजीब...

सबद – भेद : सूत्रधार : राजीव रंजन गिरि

भोजपुरी का शेक्सपियर’ कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर के जीवन पर आधारित वरिष्ठ कथाकार संजीव के उपन्यास ‘सूत्रधार’ पर राजीव रंजन गिरि का यह आलोचनात्मक आलेख उक्त उपन्यास के सभी...

परख : तंग दिनों की खातिर (कविता संग्रह) : मनोज छाबड़ा

‘तंग दिनों की ख़ातिर’ मनोज छाबड़ा का  दूसरा कविता संग्रह है. पहला संग्रह ‘अभी शेष हैं इन्द्रधनुष’ २००८ में प्रकाशित हुआ था. इन पाँच सालों में कवि ने   अपनी...

सबद भेद : केदार नाथ सिंह की कविता : ओम निश्चल

जिसमें एक-एक कारक की बेचैनी  और तद्भव का दुख निहित है(केदारनाथ सिंह की कविताएं)ओम निश्‍चल1.अपनी देशज भंगिमा के बावजूद कविता में संवेदना की आधुनिकी जितनी गतिशील और सत्‍वर केदारनाथ सिंह...

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