सविता सिंह का काव्य – संसार : अशोक कुमार पाण्डेय
सविता सिंह अपनी कविताओं में सचेत नारीवादी विचार तत्व के लिए अलग से जानी जाती हैं, उनकी कविताओं में ऐसा बहुत कुछ है जो पाठ और भाष्य के बाद भी...
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सविता सिंह अपनी कविताओं में सचेत नारीवादी विचार तत्व के लिए अलग से जानी जाती हैं, उनकी कविताओं में ऐसा बहुत कुछ है जो पाठ और भाष्य के बाद भी...
भूमंडलोत्तर कहानी की दूसरी किश्त में आकांक्षा पारे की कहानी और युवा आलोचक राकेश बिहारी का आलेख ...शिफ्ट+कंट्रोल+ऑल्ट=डिलीट आकांक्षा पारेमैंने कुछ नहीं किया. मैं बस गेम जीतने ही...
पेंटिग : रामकुमार संभावना शुरुआत की रचनाशीलता के सामर्थ्य से ही अपना पता देने लगती है, उसमें समकाल से अलहदा कोई न कोई ऐसी चीज जरुर होती है जो चमकती है...
पश्चिम की बौद्धिकता लगभग सत्य की तरह स्वीकृत अवधारणाओं, स्वभाव की तरह मान लिए गए धर्म- राज्य - सत्ता के शोषण और उत्सव की तरह अंगीकृत रीतियों को प्रश्नांकित करती...
एक देश और मरे हुए लोग(कविता-संग्रह)विमलेश त्रिपाठीबोधि प्रकाशन, जयपुरप्रथम संस्करण 2013____________________हकीकत और कथा के बीचोबीच कविता विवेक निराला देश और देश और देश के बीचमरे हुए...
और मेघ बरसते रहे (उपन्यास)रंजना जायसवाल प्रकाशक :सामयिक प्रकाशन, दरियागंज नई दिल्ली-११०००२ मूल्य -२५० स्त्रियों की मुसीबतों का जायजा लेता उपन्यास श्वेता सांड स्त्रियों को विषय मानकर हिन्दी में अनेक उपन्यास...
कलाएं सहोदर हैं, कविता की बातें संगीत और चित्रकला तक जाती हैं. नृत्य और नाट्य ललित कलाओं को साथ लेकर चलते है. गीत चतुर्वेदी का गद्य उनकी कविताओं की तरह...
(कहानी)लापता नत्थू उर्फ दुनिया ना माने रवि बुलेकहते हैं कभी-कभी सूई के छेद में से हाथी भी निकल जाता है पर पूंछ अटक जाती...
Anjali Srinivasanहिंदी कविता के परिसर को समझने और सहेजने की कोशिश करता ओम निश्चल का यह विस्तृत आलेख हिंदी कविता को सह्रदयता से समक्ष करता है, जिसमें वरिष्ठ, युवा और...
शिव कुमार गाँधी स्व-प्रशिक्षित चित्रकार हैं. उनकी चित्र- प्रदर्शनियाँ देश- विदेश में नुमायाँ हुई हैं. बच्चों में चित्रकला को बढ़ावा देने के मुहीम में लगे हैं. BETWEEN A FEW MILLES...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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