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कथा – गाथा : आकांक्षा पारे

भूमंडलोत्तर कहानी  की दूसरी किश्त में आकांक्षा पारे की कहानी और  युवा आलोचक राकेश बिहारी का आलेख ...शिफ्ट+कंट्रोल+ऑल्ट=डिलीट        आकांक्षा पारेमैंने कुछ  नहीं किया. मैं बस गेम जीतने ही...

मंगलाचार : अंकिता आनंद

पेंटिग : रामकुमार संभावना शुरुआत की रचनाशीलता के सामर्थ्य से ही अपना पता देने लगती है, उसमें समकाल से अलहदा कोई न कोई ऐसी चीज जरुर होती है जो चमकती है...

परिप्रेक्ष्य : फुटबॉल : टेरी ईगलटन

पश्चिम की बौद्धिकता लगभग सत्य की तरह स्वीकृत अवधारणाओं, स्वभाव की तरह मान लिए गए धर्म- राज्य - सत्ता के शोषण  और उत्सव की तरह अंगीकृत रीतियों को प्रश्नांकित करती...

परख : एक देश और मरे हुए लोग (विमलेश त्रिपाठी)

एक देश और मरे हुए लोग(कविता-संग्रह)विमलेश त्रिपाठीबोधि प्रकाशन, जयपुरप्रथम संस्करण 2013____________________हकीकत और कथा के बीचोबीच कविता            विवेक निराला देश और देश और देश के बीचमरे हुए...

परख : और मेघ बरसते रहे (उपन्यास) : रंजना जायसवाल

और मेघ बरसते रहे (उपन्यास)रंजना जायसवाल प्रकाशक :सामयिक प्रकाशन, दरियागंज नई दिल्ली-११०००२ मूल्य -२५०    स्त्रियों की मुसीबतों का जायजा लेता उपन्यास श्वेता सांड स्त्रियों को विषय मानकर हिन्दी में अनेक उपन्यास...

निज घर : गीत चतुर्वेदी

कलाएं सहोदर हैं, कविता की बातें संगीत और चित्रकला तक जाती हैं. नृत्य और नाट्य ललित कलाओं को साथ लेकर चलते है. गीत चतुर्वेदी का गद्य उनकी कविताओं की तरह...

सबद भेद : कविता के कुछ रूपाकार : ओम निश्चल

Anjali Srinivasanहिंदी कविता के परिसर को समझने और सहेजने की कोशिश करता ओम निश्चल का यह विस्तृत आलेख हिंदी कविता को सह्रदयता से समक्ष करता है, जिसमें वरिष्ठ, युवा और...

सहजि सहजि गुन रमैं : शिव कुमार गाँधी

शिव कुमार गाँधी स्व-प्रशिक्षित चित्रकार हैं. उनकी चित्र- प्रदर्शनियाँ देश- विदेश में नुमायाँ हुई हैं. बच्चों में चित्रकला को बढ़ावा देने के मुहीम में लगे हैं. BETWEEN A FEW MILLES...

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