सबद भेद : रघुवीर सहाय का कवि कर्म : शिरीष कुमार मौर्य
“वे तमाम संघर्ष जो मैंने नहीं किएअपना हिसाब मांगने चले आते हैं” (रघुवीर सहाय)जनमानस में वही कवि दीर्घजीवी होता है जिसकी कविता संकट में काम आये और संकट से...
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“वे तमाम संघर्ष जो मैंने नहीं किएअपना हिसाब मांगने चले आते हैं” (रघुवीर सहाय)जनमानस में वही कवि दीर्घजीवी होता है जिसकी कविता संकट में काम आये और संकट से...
गूगल से आभार सहितइब्तिदा फिर उस कहानी की आलोचक राकेश बिहारी ने समकालीन हिंदी...
समीक्षा___________________सुनहरे भविष्य का स्वप्निल संसारप्रेमशंकर रघुवंशीकभी-कभी संयोग बन जाता है कि अचानक कोई अच्छी रचना पढ़ने में आ जाती है, जिसके निमित्त उस अच्छी रचना के सर्जक से संपर्क भी...
समीक्षा__________________वंचित आबादी के खौलते सच हरे प्रकाश उपाध्यायनई सदी के युवा कथाकारों में कैलाश वानखेड़े का हस्तक्षेप इसलिए अलग से उल्लेखनीय है कि जब कहानी में भाषा को काव्यमय...
समीक्षा________________इन दिनों हिंदी कविता का परिदृश्य आशा और उत्साह से ओतप्रोत है, भारतीय भाषाओं के बीच संभवतः हिंदी में सबसे विलक्षण कविता लिखी जा रही है. स्वनाम धन्य कवियों की...
श्रद्धा - सुमनप्रख्यात साहित्यकार ज्योत्स्ना मिलन के अवसान की दुखद सूचना कल रात पीयूष दईया से मिली.ज्योत्स्ना मिलन का लिखा उपन्यास \'अ अस्तु का\' का चर्चित रहा है. उनके दो...
हिंदी साहित्यिक पत्रिकाओं के संपादकों की कार्य–शैली की चर्चा-कुचर्चा को सार्वजनिक करने से लेखक बचते हैं. युवा कवि और अनुवादक राहुल राजेश ने नया ज्ञानोदय के संपादक रहे रवीन्द्रकालिया के...
piyush daiya at jaipur Literature Festival photo-mananv singhiहोने और न होने के बीच पीयूष दईया की कविताएं : प्रभात त्रिपाठी प्रथम पाठ...
मार्केज को याद करते हुए स्त्री पुरुष के बीच के तरह-तरह के प्रेम सम्बन्धों की...
राष्ट्रभक्त कवियों की टोली(कहानी)गंगा सहाय मीणाकुछ मंचीय कवियों की टोली ने जिस निर्लज्जता के साथ सत्ता की चापलूसी की राह पकड़ी है उसे देख कर दुःख होता है. सत्ता के...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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