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सहजि सहजि गुन रमैं : हरे प्रकाश उपाध्याय

पेंटिग : Ram Kumar TWO FIGURESयुवा हरे प्रकाश उपाध्याय  हिंदी कविता के पहचाने-जाने कवि हैं. इन कविताओं में हरे प्रकाश की काव्य-रीति की सहजता, कथ्य-सौन्दर्य और विमोहन की क्षमता दिखती...

परिप्रेक्ष्य : गुलज़ार : सुशोभित सक्तावत

या  र  जु  ला  हे...(गुलज़ार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने पर सुशोभित सक्तावत का आकलन)जबान जबान की बात है, जबान जबान में फर्क होता है!मसलन, उर्दू के मशहूर लेखक मुल्ला...

परख : सृष्टि पर पहरा : केदारनाथ सिंह (कविता संग्रह)

समीक्षा : कुमार मुकुलसृष्टि पर पहरा :  केदारनाथ सिंहगजानन माधव मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन और त्रिलोचन के बाद जिन कवियों ने हिन्‍दी में नयी जमीन तोडी है...

कथा – गाथा : राकेश दूबे

युवा कथाकार राकेश दूबे का पहला कहानी संग्रह, \'सपने .. बिगुल और छोटा ताजमहल\' इस वर्ष दखल प्रकाशन से आया है. राकेश दूबे की कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर...

रीझि कर एक कहा प्रसंग : नील कमल : ककून

यह कविता मैंने गणेश पाण्डेय द्वारा संपादित ‘यात्रा’-७ अंक में पढ़ी. शहतूत का कीड़ा रेशम नहीं पैदा करता – वह तो अपना प्राकृतिक कार्य करता है, पर इस कर्म को...

सहजि सहजि गुन रमैं : प्रमोद कुमार तिवारी

प्रमोद कुमार तिवारी देशज संवेदना के रस –सिक्त कवि हैं.  जब समकालीन कवियों ने जनमानस की पर्व – परम्परा पर लगभग लिखना छोड़ ही दिया है- प्रमोद जैसे कवियों के...

सबद – भेद : समकालीन फ्रेंच कविता : मदन पाल सिंह

पेंटिग : Jean Metzingerमदन पाल सिंह फ्रेंच से सीधे हिंदी में अनुवाद कार्य कर रहे हैं. फ्रांस विचार और कलाओं का केंद्र रहा है, यह लेख समकालीन फ्रेंच कविता की...

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