सहजि सहजि गुन रमैं : हरे प्रकाश उपाध्याय
पेंटिग : Ram Kumar TWO FIGURESयुवा हरे प्रकाश उपाध्याय हिंदी कविता के पहचाने-जाने कवि हैं. इन कविताओं में हरे प्रकाश की काव्य-रीति की सहजता, कथ्य-सौन्दर्य और विमोहन की क्षमता दिखती...
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पेंटिग : Ram Kumar TWO FIGURESयुवा हरे प्रकाश उपाध्याय हिंदी कविता के पहचाने-जाने कवि हैं. इन कविताओं में हरे प्रकाश की काव्य-रीति की सहजता, कथ्य-सौन्दर्य और विमोहन की क्षमता दिखती...
या र जु ला हे...(गुलज़ार को दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलने पर सुशोभित सक्तावत का आकलन)जबान जबान की बात है, जबान जबान में फर्क होता है!मसलन, उर्दू के मशहूर लेखक मुल्ला...
इट्स माय ओन फाल्ट(घरेलू- हिंसा पर विपिन चौधरी का लेख)मैं अकेली ही सुबकती हूँ मेरा रुदन क्या जंगल में गिरे हुए पेड़ की तरह है ? रुदन...
समीक्षा : कुमार मुकुलसृष्टि पर पहरा : केदारनाथ सिंहगजानन माधव मुक्तिबोध, शमशेर बहादुर सिंह, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन और त्रिलोचन के बाद जिन कवियों ने हिन्दी में नयी जमीन तोडी है...
युवा कथाकार राकेश दूबे का पहला कहानी संग्रह, \'सपने .. बिगुल और छोटा ताजमहल\' इस वर्ष दखल प्रकाशन से आया है. राकेश दूबे की कहानियां विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर...
विमल कुमार से बातचीत : __________अभी – अभी २०१४ का विश्व पुस्तक मेला सम्पन्न हुआ है - हिंदी का परिदृश्य कैसा लगा...
सरिता शर्मा ने जब मुझे नेपाली भाषा के कवि मनोज बोगटी के बारे में बताया तब मुझे बरबस ही पिछले दिनों जोधपुर में हुए साहित्य अकादेमी के एक सत्र की...
यह कविता मैंने गणेश पाण्डेय द्वारा संपादित ‘यात्रा’-७ अंक में पढ़ी. शहतूत का कीड़ा रेशम नहीं पैदा करता – वह तो अपना प्राकृतिक कार्य करता है, पर इस कर्म को...
प्रमोद कुमार तिवारी देशज संवेदना के रस –सिक्त कवि हैं. जब समकालीन कवियों ने जनमानस की पर्व – परम्परा पर लगभग लिखना छोड़ ही दिया है- प्रमोद जैसे कवियों के...
पेंटिग : Jean Metzingerमदन पाल सिंह फ्रेंच से सीधे हिंदी में अनुवाद कार्य कर रहे हैं. फ्रांस विचार और कलाओं का केंद्र रहा है, यह लेख समकालीन फ्रेंच कविता की...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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