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रंग – राग : ख़य्याम और उमराव ज़ान : यतीन्द्र मिश्र

हिंदी सिनेमा में उमराव जान फ़िल्म का संगीत अलौकिक है. मिर्ज़ा हादी ‘रुस्वा’ का कालजयी उपन्यास, मुजफ़्फ़र अली का निर्देशन, रेखा का अभिनय, शहरयार की गज़लें, खय्याम का संगीत और...

मैं कहता आँखिन देखी : स्वप्निल श्रीवास्तव

स्‍वप्निल श्रीवास्‍तवजन्‍म ५ अक्‍टूबर १९५४ को पूर्वी उ.प्र. के जनपद सिद्धार्थनगर के सुदूर गांव मेंहनौना में.शिक्षा और जीवन की दीक्षा गोरखुपर में.पूर्व में उ.प्र. सरकार में जिला मनोरंजन कर अधिकारी...

कथा- गाथा : सलीमा : अनवर सुहैल

चित्र : Steve Mccurryहम अक्सर अपने पूर्वग्रहों के घर में रहते हैं. हालाँकि प्रत्येक पूर्वग्रह का भी सामाजिक आधार होता है और कई बार एक सतत राजनीतिक प्रतिक्रिया  के अंतर्गत...

सहजि सहजि गुन रमैं : अरुणाभ सौरभ

अरुणाभ सौरभ मैथिली और हिंदी दोनों में सक्रिय हैं, और दोनों ही भाषाओँ के साहित्य में रेखांकित हैं. यह संधि साहित्य के लिए उपजाऊ है. ‘कथकही’ मिथिलांचल में किस्सागो की...

मंगलाचार : परमेश्वर फुंकवाल

फोटो Steve McCurryपरमेश्वर फुंकवाल  इधर फिर कविता में सक्रिय हुए हैं, भारतीय रेल में रहते हुए उसे एक कवि की नज़र से भी देखते हैं. रेल श्रमिकों पर लिखी  इन कविताओं...

सहजि सहजि गुन रमैं : अनिता भारती

कविताएँ : अनिता भारती                मुजफ्फनगर से लौटने के बाद...रुखसाना का घर..1.सोचती हूँ मैंक्या तुम्हें कभी भूल पाउंगी रुखसानातुम्हारी आँखों की गहराई में झांकते...

सहजि सहजि गुन रमैं : अहर्निशसागर

अहर्निशसागर की कुछ नई कविताएँसिरोही (राजस्थान) के युवा अहर्निशसागर अपनी  कविताओं के प्रकाशन को लेकर एक कवियोचितसंकोच रखते हैं. ‘समालोचन’ में जब वह प्रथमत: दिखे तब सह्रदय साहित्य समाज नें...

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