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परख : इसलिए कहूँगी मैं (सुधा उपाध्याय)

संभावनाओं के द्वार पर दस्तक देतीं कविताएँ                ब्रजेन्द्र त्रिपाठी                               सुधा उपाध्याय का दूसरा कविता-संग्रह है-‘इसलिए कहूँगी...

परिप्रेक्ष्य : नेल्सन मंडेला

‘गोइंग होम’, एड क्‍लार्क, अप्रैल 1945नेल्सन के लिए एक विदा गीत :सुशोभित सक्तावत         एड क्‍लार्क की एक मशहूर तस्‍वीर है, वर्ष 1945 के वसंत की. उस तस्‍वीर...

सहजि सहजि गुन रमैं : मिथिलेश कुमार राय

मिथिलेष कुमार राय24 अक्टूबर,1982  सुपौल,लालपुर(बिहार)वागर्थ, परिकथा, नया ज्ञानोदय, कथादेश, कादंबिनी, साहित्य अमृत, बया, जनपथ, विपाशा आदि में कविताएं प्रकाशितवागर्थ व साहित्य अमृत द्वारा युवा प्रेरणा पुरस्कारप्रत्रकारिता मोबाइल-09473050546mithileshray82@gmail.com____________मिथिलेष कुमार रायकी कविताओं...

सहजि सहजि गन रमैं : मृत्युंजय

  देखियत कालिंदी अति कारी…  (क)धान की न जाने कै तरह की फसलसिर झुकाये बालियाँ सुनहिल खड़ी हैंपान के भीटे सलोने,महक उठती नम हवा की साँस जिनकी हरी खुशबू सेअनगिनत मछलियों...

विजयदान देथा: गौरव सोलंकी

राजस्थान के जोधपुर के \'बोरुंदा\' गाँव में रहते हुए विजयदान देथा ने राजस्थानी लोक - कथाओं को आधुनिक स्वरूप दिया, उन्हें संजोया और समृद्ध  किया.  खुद उनका लेखन विपुल है....

परिप्रेक्ष्य : ओमप्रकाश वाल्मीकि

:: श्रद्धांजलि :: युवा लेखिका अनिता भारती की ओमप्रकाश वाल्मीकि पर टिप्पणी और वाल्मीकि जी की चर्चित कृति \'जूठन\' का एक अंश. उनके होने को किसी भी तरह से धुंधला नहीं...

रीझि कर एक कहा प्रसंग : निशांत

Dressing-the-Dead-Girl : Gustave Courbetनिशांत के दो कविता संग्रह प्रकाशित हैं. उन्हें कविता का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार भी प्राप्त है. ‘फिलहाल साँप कविता’ उनके दूसरे कविता संग्रह, ‘जी हाँ लिख...

सबद भेद : लीलाधर मंडलोई की कविता पर अद्यतन : ओम निश्चल

लीलाधर मंडलोई :  छिंदवाड़ा (म.प्र.) जन्माष्टमी 1953 पुरस्कार : पूश्किन, शमशेर, नागार्जुन, रज़ा, रामविलास शर्मा, (सभी कविता के लिए), कृति सम्मान, साहित्यकार सम्मान (दिल्ली राजधानी, साहित्य अकादमी) कविता संग्रह--(घर-घर घूमा, रात बिरात, मगर एक आवाज़, काल बाँका तिरछा,...

सबद भेद : सांस्कृतिक आतंकवाद : पुष्पिता अवस्थी

Debashish-Duttaकवयित्री प्रो.पुष्पिता अवस्थी  भारतीय दूतावास एवं भारतीय सांस्कृतिक केंद्र, पारामारिबो, सूरीनाम में प्रथम सचिव एवं हिंदी प्रोफेसर के रूप में वर्ष 2001 से 2005 तक वह कार्यरत रहीं. वर्ष 2006...

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