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मति का धीर : परमानन्द श्रीवास्तव

:: श्रद्धांजलि :: गोरखपुर से आज सुबह साहित्यकार डॉ. परमानन्द श्रीवास्तव के न रहने की  दुखद सूचना मिली. कवयित्री रंजना जायसवाल ने परमानन्द जी को याद किया है, सहित्य के सीमांत पर...

मति का धीर : राजेन्द्र यादव (५)

राजेन्द्र यादव पर इस अगली कड़ी में प्रमोद कुमार तिवारी ने उनकी बहुप्रचारित ‘दुष्टता’ और हिंदी पट्टी में उनकी अनिवार्यता पर लिखा है और उम्दा लिखा है.  ‘आदमी तो अच्छा...

मति का धीर : राजेन्द्र यादव (४)

अर्चना वर्मा लगभग २२ वर्षों तक हंस के संपादन से जुडी रही हैं. यह वही समय है जब हंस अपनी लोकप्रियता और सार्थकता के चरम पर था. ज़ाहिर है अर्चना...

मति का धीर : राजेन्द्र यादव (३)

रचनाकारों के लिए हंस सहित्य का देश  था. हंस से उन्हें साहित्य की नागरिकता मिलती थी. जो स्थिति कभी आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी के समय सरस्वती की थी, राजेन्द्र  जी ने...

मति का धीर : राजेन्द्र यादव (२)

 कथाकार कविता की स्मृतियों में राजेन्द्र यादव.बाबुल मोरा नैहर छूट ही जाये        कवितायादें बहुत सारी हैं. हां, यादें हीं. हालांकि उन्हें यादें या कि स्मृतियां कह कर संबोधित करते...

मति का धीर : राजेन्द्र यादव

दूसरा राजेन्द्र यादव नहीं हो सकता                 रंजना जायसवालराजेन्द्र जी का जाना साहित्य की दुनिया की अपूरणीय क्षति है. वे जीवंत, चिरयुवा, साहसी, प्रखर...

मति का धीर : सचिन तेंदुलकर

क्रिकेट के महान खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर ने अपने सन्यास की घोषणा कर दी है. कहना न होगा यह एक युग का अंत है – यह युग सचिन का है. सचिन...

रंग – राग : लंच बाक्स : सारंग उपाध्याय

रितेश बत्रा द्वारा निर्देशित हिंदी फ़िल्म ‘लंच बाक्स’ की समीक्षा सारंग उपाध्याय द्वारा, कवि सारंग ने फिल्मों पर रचनात्मक रूप से लिखने वाले समीक्षक के रूप में अपनी पहचान बनाई है....

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