मंगलाचार : प्रज्ञा पाण्डेय
प्रज्ञा पाण्डेय (गोरखपुर,१९६२) की कुछ कविताएँ, लेख और कहानियाँ प्रकाशित है. ‘मेरा घर कहाँ है’ कहानी आधी दुनिया की यंत्रणा और शेष आधे के अत्याचार-अनाचार की त्रासद कथा है. स्त्री...
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प्रज्ञा पाण्डेय (गोरखपुर,१९६२) की कुछ कविताएँ, लेख और कहानियाँ प्रकाशित है. ‘मेरा घर कहाँ है’ कहानी आधी दुनिया की यंत्रणा और शेष आधे के अत्याचार-अनाचार की त्रासद कथा है. स्त्री...
संवेदनाओं का पुल सरिता शर्मा कृति : रेत का पुल (कविता संग्रह, संस्करण-2012)रचनाकार : मोहन राणाप्रकाशक : अंतिका...
Gabriel Cornelius Ritter von Maxस्मृति में उलटे पैर :: मनीषा कुलश्रेष्ठ1. मधुमक्खियाँ बहुत अलग थी वह शाम, अबाबीलें सर पर...
ख्यात कथाकार बटरोही की ‘किम्पुरुष क्रमश:’ एक महत्वाकांक्षी कहानी है. उसे आख्यान कहना शायद ठीक होगा. एक औपन्यासिक आख्यान, जो जितना रोचक है उतना ही बौद्धिक खुराक से भरपूर. इधर...
मुश्किल काम, असग़र वजाहतकिताबघर प्रकाशन, अंसारी रोड, दरियागंज, नयी दिल्ली 110002मूल्य 140 रुपये___________समीक्षा : आभा शर्मा ...
कालजयी कृतिओं में केन्द्रीय कथासूत्र और विचार-यात्रा के साथ-साथ अनुभव और सीख के अनेक मुक्तक बिखरे रहते हैं. रामचरितमानस ऐसी ही कृति है, जहां जीवन – प्रसंग के कई पक्ष...
हिंदी सिनेमा के खलनायकत्व के सबसे बड़े नायक प्राण को दादासाहेब फाल्के पुरस्कार मिलने पर सुशोभित की सारगर्भित टिप्पणी जो प्राण के अवदान को भी सहेजती है. हिंदी सिनेमा का सबसे चहेता...
उमेश कुमार चौहान के चार कविता संग्रह और मलयालम से हिंदी में अनुवाद की एक किताव प्रकाशित है. अपनी इस लम्बी कविता में कवि ने ऊसर शब्द का अर्थविस्तार करते...
हितेन्द्र पटेलकम्युनैलिज्म एण्ड द एन्टेलीजेन्सिया इन बिहार, 1870-1930: शेपिंग कास्ट, कम्युनिटी एण्ड नेशनहुड, ओरिएन्ट ब्लैकस्वान, नई दिल्ली, 2011, पृष्ठ संख्या 253मूल्य-645 रुपये (सजिल्द)साम्प्रदायिकता पर...
चित्रकारों के चित्रकार के नाम से विख्यात ७६ वर्षीय गणेश पाइन का कल निधन हो गया. पांच दशकों की अपनी सृजनात्मक यात्रा में गणेश पाइन की कलाकृतियों विश्वभर में प्रदर्शित...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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