मंगलाचार : अंजू शर्मा
अंजू शर्मा की कविताओं का मुख्य स्वर नारीवादी है. सभ्यतागत छल-प्रपंच के बीच स्त्री की अस्मिता और अस्तित्व के अनेक आरोह अवरोह इन कविताओं में है. साहित्यिक- सामाजिक आयोजनों में...
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अंजू शर्मा की कविताओं का मुख्य स्वर नारीवादी है. सभ्यतागत छल-प्रपंच के बीच स्त्री की अस्मिता और अस्तित्व के अनेक आरोह अवरोह इन कविताओं में है. साहित्यिक- सामाजिक आयोजनों में...
sculpture/gvelesiani/boy with a flute आलोचक विचारक पुरुषोतम अग्रवाल ने कथा साहित्य में अपनी उपस्थिति दर्ज़ की है. उनकी कुछ कहानियों प्रकाशित हुई हैं और एक उपन्यास प्रकाशित होने वाला है. इन...
सभ्यता का यह समय यांत्रिक जटिलताओं के साथ-साथ मानवीय विद्रूपताओं का भी है. युवा कवि तुषार धवल उत्तर – पूंजीवाद के भारतीय संस्करण की इन्ही विषमताओं को अपनी इस लम्बी...
आज हिंदी समाज में साहित्यकार की उपस्थिति का पता नही चलता है. समाज से सहित्य के विलोपन का यह असमय है. मध्यवर्ग से भी अनुपस्थित यह मध्यवर्गीय लेखन आज कुछ...
कविता का ऋतुओं से गहरा नाता है. ऋतुराज वसंत तो कविओं के प्रिय रहे हैं. इधर लिखी जा रही हिंदी कविता में वसंत की सुगंध सुदूर चकेरी गाँव के (सवाई...
Betty–Gerhard Richterशिवेंद्र हिंदी कहानी की युवतर पीढ़ी से हैं. यह वह पीढ़ी है जो लेखन में आजीविका की संभावना तलाश रही है. दृश्य माध्यम से जुड़े होने के कारण कहानी...
देस-वीराना में आप उन नगरों की दास्ताँ पढ़ रहे हैं जो एक दिन हम से छूट जाते हैं. इस तरह हम सब में कही न कहीं एक प्रवासी है, जो...
मनोज छाबड़ा कलाओं के साझे घर के नागरिक हैं. कविताएँ लिखते हैं. पेंटिग बनाते हैं. हजारों की संख्या में उनके बनाए कार्टून पत्र- पत्रिकाओं में बिखरे पड़े हैं. हिसार,हरियाणा से...
II प्रेम दिवस पर प्रेम कविताएँ II जब कुछ मतिमूढ़ लोग प्रेमियुगलों पर आक्रामक थे, जे.एन.यू के छात्र–छात्राओं ने एक परम्परा शुरू की, १४ फरवरी की रात प्रेम कविताओं के काव्य-पाठ...
रिज़वानुल हक़ उर्दू के चर्चित कथाकार हैं. उनकी कहानियाँ देश – विदेश की पत्र – पत्रिकाओं में प्रकाशित होकर मकबूल हुई है. यह कहानी दंगों की पृष्ठभूमि पर है. अपने...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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