रंग – राग : रविशंकर
II रवि शंकर II (रोबिन्द्रो शंकर चौधरी )७ अप्रैल,१९२० - ११ दिसम्बर,२०१२शास्त्रीय संगीत के इस दैवीय दूत को श्रद्धांजलि. भारत ही नहीं विदेशों में भी रवि शंकर भारतीय शास्त्रीय संगीत के पर्याय हैं....
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II रवि शंकर II (रोबिन्द्रो शंकर चौधरी )७ अप्रैल,१९२० - ११ दिसम्बर,२०१२शास्त्रीय संगीत के इस दैवीय दूत को श्रद्धांजलि. भारत ही नहीं विदेशों में भी रवि शंकर भारतीय शास्त्रीय संगीत के पर्याय हैं....
प्रेमचन्द गाँधी की संवेदनात्मक रचनात्मकता की यात्रा आज उस पडाव पर है जहाँ उनसे बेहतरीन की उम्मीद की जा सकती है. और वह इस सृजनात्मक-वैचारिक चुनौती को लगातार स्वीकार कर...
इधर समाज में किस्म-किस्म के बाबा नित्य नूतन भंगिमा के साथ अवतरित हो रहे हैं. लोक - परलोक सुधारने के मौलिक उपाय और मन - तन शुद्धिकरणकी साधना उन के...
नेपाल के पांच महत्वपूर्ण कवि एक साथ हिंदी में. इन कविताओं का चयन और अनुवाद किया है- नेपाली और हिंदी साहित्य के बीच सेतु का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे कवि चन्द्र गुरुंग...
कथाकार मनीषा कुलश्रेष्ठ ने चित्तौड़गढ़ के बहाने अपने स्मृतिओं की पुनर्यात्रा पर हैं. यह यात्रा चित्तौड़ के इतिहास की भी है. यह एक शहर की संस्कृति और उसके अंदर की...
फोटो : डॉ अभिज्ञातकेदारनाथ सिंह समकालीन हिंदी के सर्वाधिक जनप्रिय कवि हैं. उनकी कविताओं के मुहावरों का असर और प्रभाव हिंदी युवा कविता पर बखूबी देखा जा सकता है. अच्छी...
Shane Suttonस्कूटर अशोक आत्रेयमैं. मेरी पत्नी. मेरा बेटा. बेटी की बात अभी नहीं. सिनेमा हाल से हम बाहर आ गए. बाहर आते...
अजेय १८ मार्च १९६५, सुमनम, लाहुल-स्पिति (हिमाचल प्रदेश)पहल, तद्भव ,ज्ञानोदय, वसुधा, अकार, कथन, अन्यथा, उन्नयन, कृतिओर, सर्वनाम, सूत्र , आकण्ठ, उद्भावना ,पब्लिक अजेण्डा , जनसत्ता, प्रभातखबर, आदि पत्र - पत्रिकाओं मे...
सईद अयूब कहानीकार के रूप में अपनी पहचना बना रहे हैं. उनकी कहानिओं के विषय खासे असुविधाजनक होते हैं. जिन्नात में जहां उन्होंने मदरसों में बच्चों के यौन शोषण का...
हिंदी कवि मोहन कुमार डहेरिया का नाम शायद सुना हो आपने. शायद इसलिए कि अपने तीन प्रकाशित संग्रहों के बावजूद उन्हें नजरंदाज़ किया जाता रहा. हिंदी सहित्य की दुनिया का...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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