सहजि सहजि गुन रमैं : अनूप सेठी
अनूप सेठी10 जून, 1958. एम. ए. (हिन्दी) और एम. फिल. (हिन्दी )कविता संग्रह : जगत में मेला (आधार प्रकाशन), 2002. अनुवाद : नोम चॉम्स्की सत्ता के सामने (आधार प्रकाशन), 2006....
Home » Uncategorized » Page 60
अनूप सेठी10 जून, 1958. एम. ए. (हिन्दी) और एम. फिल. (हिन्दी )कविता संग्रह : जगत में मेला (आधार प्रकाशन), 2002. अनुवाद : नोम चॉम्स्की सत्ता के सामने (आधार प्रकाशन), 2006....
“उन तमाम महिलाओं और उनके साथिओं के नाम जिन्होंने जाति-व्यवस्था के इस सबसे बर्बर और घिनौनेरूप के खिलाफ निर्णायक जंग छेड़ी. इन औरतों के भी नाम जो सिर पर सदिओं...
शायक आलोक ने अपनी सक्रियता से इधर ध्यान खींचा है. उनमें संभावना है. कविताएँ प्रेम के इर्द गिर्द हैं, उनमें डूबती उतराती. यह एक ऐसा प्रक्षेत्र हैं जहां आवेग और...
आलोचक कवि गणेश पाण्डेय अपने बेलौस लेखन के लिए जाने जाते हैं, सीधे कहते हैं और नब्ज पकड़ लेते हैं. साहित्य के खलकर्मों पर उनकी नज़र है. प्रस्तुत आलेख क्षोभ...
हरिशंकर परसाई22 अगस्त 1924, (जमानी, होशंगाबाद¸ मध्य प्रदेश)10 अगस्त 1995 व्यंग्य संग्रह : तब की बात और थी, भूत के पाँव पीछे, बेईमानी की परत, पगडंडियों का जमाना, सदाचार का ताबीज, वैष्णव की फिसलन, विकलांग श्रद्धा का दौर, माटी कहे कुम्हार से, शिकायत मुझे...
The Death of Marat is a 1793. painting by Jacques-Louis Davidअकादमिक संसार के छल-छद्म पर सर्वेश कुमार सिंह की यह कहानी \'अपराधी\' आचार्यों की ताकत और तानाशाही से जूझती है....
कमलानाथ1946पेशे से इंजीनियर तथा सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर हैं,भारत सरकार के उद्यम एन.एच.पी.सी. में मुख्य अभियंता एवं जलविज्ञान विभागाध्यक्ष, और अंतर्राष्ट्रीय सिंचाई आयोग (आई.सी.आई.डी.) के सचिव के पदों पर रह...
सुमन केशरी की इस कहानी में स्त्रिओं का साझा डर बयाँ है. अलग वर्ग और पृष्ठभूमि के बावजूद एक स्तर पर उनके संत्रास एक ही तरह के हैं. एक ऐसी...
मोनिका कुमार११ सितम्बर १९७७, नकोदर, जालन्धर कविताएँ, अनुवाद प्रतिष्ठित पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशितसहायक प्रोफेसर (अंग्रेजी विभाग) राजकीय महाविद्यालय चंडीगढ़ई पता : turtle.walks@gmail.comमोनिका कुमार की कविताओं में कथन की सादगी है, पर...
समालोचन ने प्रतिभा सिंह की पेंटिग की प्रदर्शनी लगाई है. इन चित्रों का विषय मनुष्य और मशीन है. किस तरह से मनुष्य में यांत्रिकता का दबाव बढा है इसे यहाँ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2023 समालोचन | powered by zwantum