Uncategorized

बहसतलब : रचना और आलोचना का सवाल :४:महेश और प्रभात

रचना और आलोचना के रिश्ते को लेकर शुरू हुई संवाद श्रृंखला को अपने अपने तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं युवा लेखक समीक्षक महेश चंद्र पुनेठा और प्रभात कुमार मिश्र. संकटग्रस्त समय में...

बहसतलब : रचना और आलोचना का सवाल :३:मोहन श्रोत्रिय

बहसतलब के अंतर्गत रचना और आलोचना के सवाल पर गोपाल प्रधान और जगदीश्वर चुतर्वेदी के वैचारिकी-क्रम को आगे बढ़ा रहे हैं लेखक मोहन श्रोत्रिय. आलोचना के संकट पर विचार करते...

बहसतलब : रचना और आलोचना का सवाल :२ :

रचना और आलोचना के सवाल पर संवाद को आगे बड़ा रहे हैं जनसंचार की सैद्धान्तिकी के विशेषज्ञ और प्रसिद्ध आलोचक जगदीश्वर चतुर्वेदी. आलोचना में पाठ को देखने की उतर आधुनिक...

बहसतलब : रचना और आलोचना का सवाल :१:

            आलोचना जहां पाठ केंद्रित होती है वही कई बार वह स्वतंत्र और स्वायत्त भी. अक्सर वह पाठ को आलोकित करती है, व्याख्यित करती है, उसकी...

सहजि सहजि गुन रमैं : सुधीर सक्सेना

सुधीर सक्सेनाजन्म - लखनऊ में ३० सितम्बर, १९५५कविता संग्रह -- \'कभी न छीने काल\' , \'बहुत दिनों बाद\' \'समरकंद में बाबर\', \'रात जब चंद्रमा बजाता है बाँसुरी\'सम्मान --- \'सोमदत्त पुरस्कार\', \'पुश्किन...

परिप्रेक्ष्य : अदम गोंडवी : वह पगडण्डी अदम के गांव जाती है

 अदम गोंडवी : वह पगडण्डी अदम के गांव जाती हैपरितोष मणि अदम गोंडवी नहीं रहे. गज़लों के बहाने आम जनता के प्रति हो रहे अन्याय को प्रतिरोध की आवाज़ देने...

सहजि सहजि गुन रमैं : समीर वरण नंदी

( 1956-2018)समीर वरण नंदी से शायद यह आपकी पहली मुलाकात हो. समीर की कविताओं में हिंदी का काव्य- मुहावरा बांग्ला की संवेदना से मिलकर दीप्त हो उठा है. काल-बोध से बिद्ध...

परिप्रेक्ष्य : इस साहित्य समय में तीन हमसफर : राकेश श्रीमाल

साहित्य की दुनिया में दोस्ती के क्या मायने होते हैं ? आलोचक निर्मला जैन ने अपने तीन गहरे दोस्तों कृष्‍णा सोबती, मन्‍नू भंडारी और उषा प्रियंवदा पर एक किताब लिखी.....

सहजि सहजि गुन रमैं : फरीद खाँ

फरीद खाँ की कुछ नई कविताएँगंगा मस्जिदयह बचपन की बात है, पटना की.गंगा किनारे वाली ‘गंगा मस्जिद’ की मीनार पर,खड़े होकर घंटों गंगा को देखा करता था.गंगा छेड़ते हुए मस्जिद...

मति का धीर : नागार्जुन

अपने दुःख को देखा सब के ऊपर छाया,आह पी गया, हंसी व्यंग्य की ऊपर आई............................................त्रिलोचन  कवि आलोचक नंद भारद्वाज ने इस लेख में नागार्जन के व्यक्तित्व, रचनाधर्मिता और लोक भाषाओं...

Page 67 of 69 1 66 67 68 69

फ़ेसबुक पर जुड़ें