अरसलान और बहज़ाद : पवन करण
‘मौत की किताब’ और ‘नेमतख़ाना’ के बाद ‘अरसलान और बहज़ाद’ ख़ालिद जावेद का तीसरा उपन्यास है, जो उर्दू से हिंदी ...
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‘मौत की किताब’ और ‘नेमतख़ाना’ के बाद ‘अरसलान और बहज़ाद’ ख़ालिद जावेद का तीसरा उपन्यास है, जो उर्दू से हिंदी ...
हिंदी-उर्दू कथा-साहित्य के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपने को रेखांकित करने का यह सही समय है. जहाँ गीतांजलि श्री को ...
भारतीय साहित्य विशेष रूप से उपन्यासों के लिए साल 2022 कामयाब रहा, हिंदी के उपन्यास ‘रेत-समाधि’ के अनुवाद को जहाँ ...
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