प्रभात की नई कविताएँ
प्रभात की भाषा की संयत, पारदर्शी सादगी में एक ऐसी कंपन है, जो जीवन के दृश्यों को असाधारण बना देती ...
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प्रभात की भाषा की संयत, पारदर्शी सादगी में एक ऐसी कंपन है, जो जीवन के दृश्यों को असाधारण बना देती ...
‘अपनों में नहीं रह पाने का गीत’ तथा ‘बंजारा नमक लाया' के बाद ‘अबके मरेंगे तो बदली बनेंगे’ प्रभात की ...
'क्योंकि मेरी समस्त यादें /सताई हुई नहीं हैं.' __ वरिष्ठ कवि अरुण कमल ने प्रभात के पहले संग्रह ‘अपनों में ...
असमति के इस दूसरे अंक में विनोद दास, लीलाधर मंडलोई, नवल शुक्ल, सविता सिंह, पवन करण, प्रभात, केशव तिवारी, प्रभात ...
प्रभात की कविताओं पर लिखते हुए अरुण कमल ने माना है कि ‘यह हिंदी कविता की उंचाई भी है और ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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