वीरेंद्र यादव की ख़ाली जगह : प्रीति चौधरी
वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव के आकस्मिक निधन ने समकालीन वैचारिक परिदृश्य में एक गहरी रिक्ति उत्पन्न कर दी है. स्वतंत्रता-संघर्ष ...
Home » वीरेंद्र यादव
वरिष्ठ आलोचक वीरेंद्र यादव के आकस्मिक निधन ने समकालीन वैचारिक परिदृश्य में एक गहरी रिक्ति उत्पन्न कर दी है. स्वतंत्रता-संघर्ष ...
हिंदी साहित्य-संसार में अधिकतर पुरस्कार संदिग्ध और विवादास्पद हो जाते हैं. इन्हें लेखक के विचलन के रूप में भी देखा ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
सर्वाधिकार सुरक्षित © 2010-2026 समालोचन | powered by zwantum