शुभम नेगी की कविताएँ
शुभम नेगी के पास कहने के लिए बहुत कुछ है, और वे उसे तरह-तरह से कहते हैं. कहानियों से, फ़िल्मों ...
शुभम नेगी के पास कहने के लिए बहुत कुछ है, और वे उसे तरह-तरह से कहते हैं. कहानियों से, फ़िल्मों ...
१९६७ में अज्ञेय ने आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी से यह जानना चाहा था कि इक्कीसवीं सदी का हिंदी साहित्य कैसा होगा. ...
रमाकांत शर्मा ‘उद्भ्रांत’ (4 सितम्बर, 1948) की आत्मकथा ‘मैंने जो जिया’ के तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं. कवि की ...
लास्लो क्रास्नाहोरकाई का 7 दिसंबर 2025 को स्टॉकहोम में दिया गया नोबेल-व्याख्यान आधुनिकता की उस थकान का सघन दस्तावेज़ है, ...
यह एक उदास कर देने वाली गाथा है कि सच्चे, आदर्शवादी और बलिदानी लोग किस तरह धीरे-धीरे परिदृश्य से गायब ...
वाम प्रकाशन ने हाल में कई विचारोत्तेजक पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित किए हैं. इन्हीं में कॉमरेड आर. बी. मोरे की ...
यह कहना आसान है कि भारतीयों के पास इतिहास-बोध नहीं था, कठिन यह देखना है कि उनका इतिहास-बोध काम कैसे ...
रूटीन की निरर्थकता भी एक सामाजिक आत्महत्या ही है. आत्महत्या के विचार की सुरंग में प्रवेश करती बाबुषा कोहली की ...
फिल क्ले की कहानी ‘Redeployment’ युद्ध से लौटे एक सैनिक के अनुभवों पर केंद्रित है. यह कहानी केवल सैनिक जीवन ...
राजनीति एक आधुनिक अवधारणा है, पर इससे जुड़ी वैचारिक परंपरा प्राचीन है. यूरोप से लेकर भारत तक इसकी अवधारणात्मक यात्रा ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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