सत्यनारायण व्रतकथा : एक आलोचनात्मक पाठ : चंद्रभूषण
भारतीय लोक-वृत्त में प्रसारित कथाओं, पर्वों और अनुष्ठानों पर आलोचनात्मक चिंतन का सूत्रपात औपनिवेशिक भारत में हुआ, देशी और विदेशी ...
भारतीय लोक-वृत्त में प्रसारित कथाओं, पर्वों और अनुष्ठानों पर आलोचनात्मक चिंतन का सूत्रपात औपनिवेशिक भारत में हुआ, देशी और विदेशी ...
कलाएँ निजी अनुभवों को सहजता से सामूहिक ठिकानों में रूपांतरित कर देती हैं. पीड़ा, विस्थापन और आकांक्षा एक बड़े सांस्कृतिक ...
पुरबियों का निर्वासन एक ऐसी आपदा है जिसे गाने के लिए भिखारी ठाकुर को एक शैली ही विकसित करनी पड़ ...
यहूदी कवयित्री और अनुवादक रोज़ आउसलैंडर (1901–1988) की कविताएँ स्मृति और आघात के संगम पर खड़ी हैं; यही तनाव उनके ...
क्या आप भारतीय सिनेमा की पहली दलित अभिनेत्री पी.के. रोजी को जानते हैं, जिनका नाम उपेक्षा के हाशिये में विलुप्त ...
“ऋषि जा चुके थे. मनुष्यों ने देवताओं से पूछा, अब हमारा ऋषि कौन होगा? देवताओं का उत्तर था. अब तर्क ...
1973 से 2021 के बीच प्रकाशित पहल के 125 अंक ज्ञानरंजन की प्रतिबद्धता, संकल्प और ऊर्जा के दस्तावेज़ हैं. साहित्यिक ...
युद्ध चाहे गृह ही क्यों न हो, सब कुछ हमेशा के लिए बदल देता है. उसकी आग वर्षों तक जलती ...
अखिलेश सिंह के गद्य से आप सुपरिचित हैं. उनकी यह कहानी देखिए जहाँ आदमी अपनी भूख से ज़्यादा अपने भीतर ...
कहानी के तत्वों की अधिकतम रक्षा करते हुए, किसी कथा का अपने समय की राजनीति पर ठोस और बहुस्तरीय टिप्पणी ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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