मदर मेरी कम्स टू मी : अमिता शीरीं
अरुन्धति रॉय समकालीन महत्वपूर्ण लेखिका तो हैं ही, वे उन कुछ लेखकों के सिलसिले में भी हैं जिन्होंने अपने शब्द ...
अरुन्धति रॉय समकालीन महत्वपूर्ण लेखिका तो हैं ही, वे उन कुछ लेखकों के सिलसिले में भी हैं जिन्होंने अपने शब्द ...
वरिष्ठ आलोचक रोहिणी अग्रवाल ने आयशा आरफ़ीन की कहानी ‘स्वाहा’ के संदर्भ में यह सवाल उठाया है कि ‘कहानीपन का ...
आयशा आरफ़ीन का कहानी-संग्रह ‘मिर्र’ इसी वर्ष राजकमल से प्रकाशित हुआ है. उनकी कहानियों में रहस्य का एक आवरण रहता ...
वरिष्ठ लेखक और अनुवादक जयप्रकाश सावंत ने स्पेनिश भाषा के प्रसिद्ध रचनाकार बोर्हेस (1899–1986) के सान्निध्य और साहित्य पर कुछ ...
एली वीज़ल (1928–2016) केवल एक लेखक नहीं, बल्कि इतिहास के सबसे गहरे घाव के जीवित साक्षी थे. होलोकॉस्ट से बच ...
माँ इतनी जगह घेरे रहती है कि पिता का होना दिखाई नहीं देता. रौब-दाब की दहाड़ ही सुनाई पड़ती है. ...
1934 में अज्ञेय की कहानी ‘गैंग्रीन’ प्रकाशित हुई, जिसका शीर्षक बाद में स्वयं लेखक ने बदलकर ‘रोज़’ कर दिया. उस ...
64 वर्ष पूर्व हुई इस बातचीत को पढ़ना केवल एक पाठ नहीं, बल्कि एक अनुभव से गुज़रना है. यह उस ...
यह वक्तव्य साहित्य में ७५ वर्षों से भटकते उस व्यक्ति का है जो साहित्य से कभी भटका नहीं. इस भटकने ...
आज़ादी के बाद इस महाक्षेत्र में तानाशाही और धार्मिक कट्टरता के विरोध के कारण फ़ैज़ अहमद फ़ैज़, अहमद फ़राज़ और ...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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