फिल्म

तुम्हें याद है सिर्फ ख़ून का स्वाद: कुमार अम्‍बुज

तुम्हें याद है सिर्फ ख़ून का स्वाद: कुमार अम्‍बुज

अंग्रेजी के महानतम कवि-नाटककार शेक्सपीयर की कालजयी कृति ‘मैकबेथ’ में हमेशा से विश्व सिनेमा की रुचि रही है. पिछले वर्ष अमरीकी निर्देशक जोएल कोएन की फ़िल्म ‘द ट्रैजेडी ऑफ़ मैकबेथ’...

विष्णु खरे: सिनेमा का खरा व्याख्याता:  सुदीप सोहनी

विष्णु खरे: सिनेमा का खरा व्याख्याता: सुदीप सोहनी

कवि, आलोचक, फ़िल्म मीमांसक, अनुवादक, पत्रकार विष्णु खरे (9 फरवरी 1940–19 सितम्बर 2018) की स्मृति में युवा लेखक प्रचण्ड प्रवीर और कुछ मित्रों ने यह सोचा कि उनकी याद में...

आंद्रेई तारकोवस्‍की: नॉस्‍टेल्जिया: कुमार अम्‍बुज

आंद्रेई तारकोवस्‍की: नॉस्‍टेल्जिया: कुमार अम्‍बुज

विश्व के महानतम निर्देशकों में से एक रूस के आंद्रेई तारकोवस्‍की द्वारा निर्देशित फ़िल्मों के काव्यत्व की चर्चा होती रही है, उनकी फ़िल्में किसी कलाकृति जैसी हैं. इनमें से एक...

हिरोशिमा, मेरा प्‍यार: कुमार अम्‍बुज

हिरोशिमा, मेरा प्‍यार: कुमार अम्‍बुज

कवि कुमार अम्बुज हिंदी में फ़िल्मों पर सृजनात्मक ढंग से लिखने वाले कुछ गिने चुने लेखकों में शामिल हैं. मर्गेरीट ड्यूरॉस द्वारा लिखित और अलँ रेने निर्देशित फ़्रांसिसी/जापानी फ़िल्म 'हिरोशिमा...

मणि कौल: दृश्यों की अंतर-ध्वनि का फ़िल्मकार: सुदीप सोहनी

मणि कौल: दृश्यों की अंतर-ध्वनि का फ़िल्मकार: सुदीप सोहनी

विनोद कुमार शुक्ल ने पीयूष दईया से संवाद (समालोचन पर प्रकाशित) में फ़िल्मकार मणि कौल के विषय में यह कहा है कि ‘दर्शक मणि कौल की फिल्म में उसी तरह...

दिलीप कुमार: हमारे बाद इस महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे: सत्यदेव त्रिपाठी

दिलीप कुमार: हमारे बाद इस महफ़िल में अफ़साने बयां होंगे: सत्यदेव त्रिपाठी

सत्यदेव त्रिपाठी फ़िल्मों और रंगमंच पर वर्षों से लिखते रहें हैं, इन विषयों पर उनकी कई क़िताबें प्रकाशित हुईं हैं. अभिनेता दिलीप कुमार पर लिखा गया यह लेख दरअसल सत्यदेव...

दिलीप कुमार और उनका सिनेमा: सुशील कृष्ण गोरे

दिलीप कुमार और उनका सिनेमा: सुशील कृष्ण गोरे

अभिनेता दिलीप कुमार की प्रसिद्धि असाधारण थी, वह अद्वितीय हैं. जिस तरह से उनके व्यक्तित्व में गहराई है उसी तरह से उनके अभिनय की भी अनेक परतें हैं. सुशील कृष्ण...

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