फ़िल्म

रेत में भी रेत का फूल खिलता है: कुमार अम्‍बुज

रेत में भी रेत का फूल खिलता है: कुमार अम्‍बुज

1964 की हिरोशी तेशिगहारा (Hiroshi Teshigahara) द्वारा निर्देशित जापानी फ़िल्म ‘वुमन इन द ड्यून्स’ को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिले हैं. विश्व सिनेमा से कुमार अम्बुज की इस श्रृंखला का यह...

दूसरों की मारक ख़ामोशी:  कुमार अम्‍बुज

दूसरों की मारक ख़ामोशी: कुमार अम्‍बुज

नम्बर, 2022 में ‘विश्व सिनेमा से कुमार अम्बुज’ की चौदहवीं कड़ी के साथ यह स्वीकारोक्ति भी नत्थी थी- “यह पूर्ण विराम नहीं, साँस लेने की नीयत से किंचित विश्राम है....

मेरा कटा हुआ सिर एक क्षमायाचना है: कुमार अम्‍बुज

मेरा कटा हुआ सिर एक क्षमायाचना है: कुमार अम्‍बुज

‘विश्व सिनेमा से कुमार अम्बुज’ की शुरुआत पिछले वर्ष सर्दियों की उठान के साथ हुई थी. लगभग एक वर्ष में विश्व की कालजयी फ़िल्मों में से चौदह फ़िल्मों पर काम...

अपराह्न पाँच बजे: कुमार अम्‍बुज

अपराह्न पाँच बजे: कुमार अम्‍बुज

‘विश्व सिनेमा से कुमार अम्बुज’ श्रृंखला कालजयी फ़िल्मों को समझने और अपने समय को बूझने की गहरी अंतर्दृष्टि देती है, भाषा की अपनी संभव ऊंचाई के साथ. यह फ़िल्म की...

अनिर्णय की त्रासदी: कुमार अम्बुज

अनिर्णय की त्रासदी: कुमार अम्बुज

शेक्सपियर ने 1600 ईसवी के आप-पास नाटक ‘हैमलेट’ की रचना की थी. कई देशों में इसपर आधारित और इससे प्रभावित अनगिनत फ़िल्में बन चुकी हैं. लॉरेन्स ओलिविएर द्वारा निर्देशित फ़िल्म...

वर्चस्व और अमीरी की रुग्णता का संधिवात:  कुमार अम्‍बुज

वर्चस्व और अमीरी की रुग्णता का संधिवात: कुमार अम्‍बुज

महत्वपूर्ण चेक लेखक बोहुमिल ह्राबाल के उपन्यास पर आधारित फ़िल्म ‘I Served the King of England’ (2006) आपने शायद देखी हो. ‘विश्व सिनेमा से कुमार अम्बुज’ की यह कड़ी इसी...

भूलन कांदा : मुद्रित से सेल्युलाइड तक  की यात्रा: रमेश अनुपम

भूलन कांदा : मुद्रित से सेल्युलाइड तक की यात्रा: रमेश अनुपम

'भूलन कांदा’ वनौषधि है, माना जाता है कि इसका स्पर्श मनुष्य को उसके रास्ते से भटका देती है. संजीव बख्शी का यह उपन्यास २०१० में प्रकाशित हुआ था. इस पर...

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