आलेख

निराला : इलाहाबाद के पथ पर दलित स्त्री : रजनी दिसोदिया

 निराला की प्रसिद्ध कविता ‘तोड़ती पत्थर’ के कई पाठ हैं.  इस कविता का एक दलित पाठ प्रसिद्ध लेखक कंवल भारती ने किया था. समालोचन पर ही शिव किशोर तिवारी की...

दिनकर : एक आत्मकथा जो लिखी नहीं गई : प्रवीण प्रणव

प्रवीण प्रणव माइक्रोसॉफ्ट कम्पनी में आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में कार्य कर रहें हैं और साहित्य में भी उनकी रुचि है. उनके दो कविता संग्रह और कुछ लेख आदि  प्रकाशित...

मैनेजर पाण्डेय : दृष्टि और मीमांसा : राजाराम भादू

मैनेजर पाण्डेय : दृष्टि और मीमांसा : राजाराम भादू

प्रख्यात आलोचक  मैनेजर पाण्डेय के अस्सीवें वर्ष में समालोचन उनकी कृतियों को केंद्र में रखकर ‘आलोचना का आलोक’ आयोजन में आलेख प्रकाशित कर रहा है.  इस क्रम में चिंतक-लेखक राजाराम...

जन्मशताब्दी वर्ष : चंद्रकिरण सौनरेक्सा

लेखिकाओं के जन्मशताब्दी वर्ष आयोजन को लेकर हिंदी समाज अनुदार दिखता है. कथाकार चन्द्रकिरण सोनरेक्सा का जन्म आज ही के दिन सौ वर्ष पूर्व हुआ था. उनके लेखन पर चर्चाएँ...

अदम गोण्डवी : मुक्तिकामी चेतना का कवि : आनन्द पाण्डेय

(फोटो आभार : वीरेन्द्र गुसाईं) ‘भूख के अहसास को शेरो सुखन तक ले चलो.या अदब को मुफ़लिसों की अंजुमन तक ले चलो.’(अदम गोंडवी)  वरिष्ठ और महत्वपूर्ण आलोचक मैनेजर पाण्डेय ने अदम...

मैनेजर पाण्डेय : आलोचना की विवेकपूर्ण यात्रा : कमलानंद झा

 आलोचना भी रचना है, वह जिस कृति से सम्बोधित होती है उससे पार जाती है और बड़े सामाजिक–सांस्कृतिक संदर्भों में उसे देखती-परखती है. इस प्रक्रिया में उस रचना से अलग...

मैनेजर पाण्डेय का आलोचना-संसार : रवि रंजन

मैनेजर पाण्डेय का आलोचना-संसार : रवि रंजन

साहित्य ही नहीं समाज को भी निर्भय आलोचकों की जरूरत होती है. मैनेजर पाण्डेय अपनी आलोचना से ये दोनों कार्य करते हैं. उनके लिए साहित्य मनुष्यता में मनुष्य की रुचि...

राष्ट्र, हिंदी और बहुभाषिकता : रमाशंकर सिंह

राष्ट्र, हिंदी और बहुभाषिकता : रमाशंकर सिंह

किसी भी सम्प्रभु राष्ट्र की अपनी राष्ट्र भाषा होती है/होनी चाहिए. यह पश्चिम में विकसित राष्ट्र-राज्य की मूल अवधारणाओं में से एक थी. हिंदी (हिन्दुस्तानी) अपने को अपनी व्यापकता के...

भाष्य : शमशेर की “टूटी हुई, बिखरी हुई” : सदाशिव श्रोत्रिय

By Matteo Baroni‘हो चुकी जब ख़त्‍म अपनी जिंदगी की दास्ताँउनकी फ़रमाइश हुई है, इसको दोबारा कहें.’ (शमशेर)प्रेम की तीव्रता, सघनता और गहन एन्द्रियता के मार्क्सवादी कवि शमशेर बहादुर सिंह की...

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