आलेख

ईरान में किताबों पर सेंसरशिप : यादवेन्द्र

वैज्ञानिक और हिंदी के लेखक,अनुवादक यादवेन्द्र इधर ईरान के सांस्कृतिक परिदृश्य पर कार्य कर रहें हैं. प्रस्तुत आलेख  ईरानी क्रांति के बाद उभरे कट्टर धार्मिक राजनीतिक सत्ता द्वारा साहित्य पर...

पुरुषार्थवती देवी एवं रामेश्वरी देवी गोयल: सुजीत कुमार सिंह

पुरुषार्थवती देवी एवं रामेश्वरी देवी गोयल: सुजीत कुमार सिंह

इतिहास कुछ लोगों के लिए बेरहम होता है, चाहे वह साहित्य का ही क्यों न हो. पुरुषार्थवती देवी एवं रामेश्वरी देवी गोयल दोनों छायावाद की कवयित्रियाँ हैं. दोनों का जन्म...

कविता क्यों और कैसे पढ़ें? : रामेश्वर राय

कविता क्या है के साथ-साथ कविता क्यों और कैसे पढ़े भी साहित्य के बड़े सवाल हैं. ख़ासकर विमर्शों द्वारा उनके अनुकूलन और व्याख्या/दुर्व्याख्या के इस दौर में यह और प्रासंगिक बनते...

अंतर्दृष्टि पत्रिका की अथकथा : विनोद दास

अंतर्दृष्टि पत्रिका की अथकथा : विनोद दास

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता की बात ‘मधुमती’ के बहाने शुरू हुई है तो अब दूर तलक जाएगी. साहित्यिक पत्रिका निकालना दीवानों का काम है. कोई अच्छा भला आदमी यह काम...

भाष्य : ब्रह्मराक्षस ( मुक्तिबोध) : सदाशिव श्रोत्रिय

सदाशिव श्रोत्रिय ने ‘श्रेष्ठ काव्य के प्रति पाठकों की बढती अरुचि और घटती समझ को देखते हुए’ अपनी पसंद की कविताओं के भाष्य का उपक्रम इधर आरम्भ किया है. कविता...

हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता और मधुमती: पंकज पराशर

भारत में पत्रकारिता और स्वाधीनता संघर्ष का नजदीकी रिश्ता रहा है, हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता भी इसी औपनिवेशिक विरोधी चेतना के बीच विकसित हुई. हिंदी साहित्य के एक युग का...

लोग रौशनी की तलाश में कविता के पास आते हैं : पंकज चतुर्वेदी

लोग रौशनी की तलाश में कविता के पास आते हैं : पंकज चतुर्वेदी

ठीक है आप कवि कर्म को महिमा मंडित नहीं करना चाहते. उसे ‘ब्रह्म सहोदर’ नहीं मानते कोई बात नहीं. पर कविता में जो असाधारणता है उसे कवि से आप अलग...

कविता का प्रक्षेत्र : राहुल राजेश

हिंदी कविता का परिसर विस्तृत है. इसमें से प्रभा मुजुमदार, अशोक सिंह और संतोष अलेक्स की कविताओं पर राहुल राजेश का यह आलेख प्रस्तुत है.                                                                कविता का प्रक्षेत्र : प्रभा...

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