संस्मरण

लालबहादुर वर्मा: आखिरी पड़ाव और भविष्य में छलांग: विनोद शाही

लालबहादुर वर्मा से मेरा पहला परिचय उनकी क़िताब ‘यूरोप का इतिहास’ (पुनर्जागरण से क्रांति तक) से हुआ जब मैं १८ साल का ही था, इस पुस्तक को मैंने किसी उपन्यास...

जितेंद्र कुमार: खुद अपना एक दिलचस्प अपयश: अशोक अग्रवाल

जितेंद्र कुमार: खुद अपना एक दिलचस्प अपयश: अशोक अग्रवाल

जितेन्द्र कुमार (1936-2006) ने कहानियां लिखीं, कविताएँ लिखीं और एक लेखक का जीवन जिया. वे जब थे तब उन्हें विस्मय से देखा जाता था, आज उन्हें पढ़ते हुए अचरज होता...

नामवर सिंह : शिवमंगल सिद्धांतकर

नलिन विलोचन शर्मा, राजकमल चौधरी, गोरख पाण्डेय पर शिवमंगल सिद्धांतकार के संस्मरण आप पढ़ चुके हैं. यह श्रृंखला कथाकार ज्ञानचंद बागड़ी के सहयोग से प्रस्तुत की जा रही है.  ...

हरजीत के यार (१) : नवीन कुमार नैथानी और तेजी ग्रोवर

आज हरजीत (१९५९-१९९९) होते तो अपना ६२वां जन्म दिन अपने यारों के साथ मना रहे होते. इस मकबूल शायर और बेहतरीन कलाकार को जाने की जल्दी थी.हरजीत की कुछ ग़ज़लें...

शम्सुर्रहमान फ़ारूक़ी: कुछ बातें, चन्द यादें: रिज़वानुल हक़

  अदब में नस्लें कैसे संवारी जाती हैं ? एक बड़ा लेखक किस तरह से अपनी भाषा के युवा से संवाद स्थापित करता है और उसकी खोज़-खबर रखता है ?  कैसे वह...

गोरख पाण्डेय : शिवमंगल सिद्धांतकर

 गोरख पाण्डेय के लेखन की शुरुआत १९६९ के किसान आंदोलन में उनके जुड़ाव से हुई और वे भोजपुरी में गीत लिखने लगे बाद में वे जन संस्कृति मंच के संस्थापक...

नलिन विलोचन शर्मा : शिवमंगल सिद्धांतकर

नकेनवादी,  प्रपद्यवादी कवि, आलोचक और चिंतक नलिन विलोचन शर्मा हिंदी में रहस्य की तरह हैं और उनके लेखन तथा व्यक्तित्व को लेकर रुचि अभी भी बनी हुई है जैसे मलयज...

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