किताब पहले भी लिखी जाती थी पर प्रिंटिंग प्रेस से निकलकर किताब किताबें हुईं, बहुत दिनों तक उन्हें पवित्र और...
‘समयांतर’ के संपादक पंकज बिष्ट (जन्म : २० फरवरी, १९४६) का आज ७५ वां जन्म दिन है. पांच दशकों की...
मनोज मल्हार की फिल्मों और नाटकों में भी रुचि है, समालोचन पर उनकी कविताएँ पहली बार आ रहीं हैं. इन...
हिंदी के वरिष्ठ कवि नरेश सक्सेना अपनी कविताओं के साथ-साथ कविता पर रोचक, अर्थगर्भित बातचीत के लिए भी जाने जाते...
जिसे आज हम प्रेम दिवस कहते हैं, कभी वह वसंतोत्सव/मदनोत्सव के रूप में इस देश में मनाया जाता था. स्त्री-पुरुष...
संदीप नाईक की ये कविताएँ वैसे तो जनवरी में ही प्रकाशित हो जानी थी. ये कविताएँ वर्ष की शुरुआत की आशा से भरी...
भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित ‘स्मृतियों का बाइस्कोप’ शैलेंद्र शैल के स्मरणों का संग्रह है जिसमें आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी, डॉ,...
मध्यकाल के कवि केवल कवि नहीं थे, जैसे कबीर निरे कवि नहीं हैं, रैदास भी उसी तरह से भारतीय समाज...
वरिष्ठ लेखिका अनामिका का उपन्यास \'आईनासाज़\' इस वर्ष राजकमल प्रकाशन से छप कर आया है. इसको देख-परख रहें हैं अर्पण...
देवकीनन्दन खत्री द्वारा रचित उपन्यास ‘चन्द्रकान्ता सन्तति’ हिंदी में अब एक क्लैसिक की हैसियत रखता है. आलोचना ने जिसे शुरू...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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