मुहावरे की मौत : पवन करण
अनुराग अनंत के कहानी-संग्रह ‘मुहावरे की मौत’ की चर्चा कवि-लेखक पवन करण कर रहे हैं. यह संग्रह लोकभारती से प्रकाशित हुआ है.
अनुराग अनंत के कहानी-संग्रह ‘मुहावरे की मौत’ की चर्चा कवि-लेखक पवन करण कर रहे हैं. यह संग्रह लोकभारती से प्रकाशित हुआ है.
सबऑल्टर्न अध्ययन समूह के संस्थापक सदस्य, राजनीतिक सिद्धांतकार, मानवशास्त्री और इतिहासकार पार्थ चटर्जी ने अंग्रेज़ी और बांग्ला में तीस से अधिक पुस्तकों का लेखन-संपादन किया है. ‘नेशनलिस्ट थॉट एंड द...
‘मैं बेहोशी का एक पत्थर था’ वीरू सोनकर का दूसरा कविता-संग्रह है, जिसे ‘अनबाउंड स्क्रिप्ट’ ने प्रकाशित किया है. इसकी चर्चा कर रहे हैं, युवा आलोचक संतोष अर्श.
‘जेएनयू अनंत : जेएनयू कथा अनंता’ और ‘हाउस हसबैंड की डायरी’ जैसे चर्चित किताबों के लेखक जे. सुशील की संस्मरणात्मक पुस्तक ‘दुःख की दुनिया भीतर है’ की समीक्षा नीरज कुमार...
‘शिया बटर’, ‘कैफ़े कॉफ़ी डे’, ‘बंकर’ जैसी कहानियों के लेखक कैफ़ी हाशमी का कहानी संग्रह, ‘शिया बटर’ इसी वर्ष लोकभारती प्रकाशन से आया है. इस संग्रह की चर्चा कर रहे...
रमाकांत शर्मा ‘उद्भ्रांत’ (4 सितम्बर, 1948) की आत्मकथा ‘मैंने जो जिया’ के तीन खंड प्रकाशित हो चुके हैं. कवि की कथा के साथ-साथ यह अपने समय की भी कथा है....
वाम प्रकाशन ने हाल में कई विचारोत्तेजक पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित किए हैं. इन्हीं में कॉमरेड आर. बी. मोरे की आत्मकथा और जीवनी को संयोजित रूप में प्रस्तुत करने वाली...
कुछ चीजें ऐसी हैं जिन्हें हम कभी पूरी तरह नहीं जान सकते, जैसे प्रेम. इश्क के दरिया का पानी हर बार बदल जाता है; पुरानी हिकमतें यहाँ कारगर नहीं होतीं....
अपनी न्यूनतमवादी शैली (मिनिमलिस्ट) और सूक्ष्म भावों के लिए विख्यात फ़्रांसीसी कवयित्री आनी देवू बेर्तलो की कविताओं का हिंदी अनुवाद कवि रुस्तम सिंह ने किया है, जिसे Des Plumes Press...
युवा कथाकार आयशा आरफ़ीन का पहला कहानी-संग्रह ‘मिर्र’ इसी वर्ष राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित हुआ है. आयशा आरफ़ीन की कहानियाँ और अनुवाद आप पहले भी पढ़ते रहे हैं. उनकी कहानियों...
समालोचन साहित्य, विचार और कलाओं की हिंदी की प्रतिनिधि वेब पत्रिका है. डिजिटल माध्यम में स्तरीय, विश्वसनीय, सुरुचिपूर्ण और नवोन्मेषी साहित्यिक पत्रिका की जरूरत को ध्यान में रखते हुए 'समालोचन' का प्रकाशन २०१० से प्रारम्भ हुआ, तब से यह नियमित और अनवरत है. विषयों की विविधता और दृष्टियों की बहुलता ने इसे हमारे समय की सांस्कृतिक परिघटना में बदल दिया है.
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