समीक्षा

हिंदी में दिलीप चित्रे की कविताएँ : यतीश कुमार

हिंदी में दिलीप चित्रे की कविताएँ : यतीश कुमार

भारतीय अंग्रेजी लेखकों में दिलीप चित्रे (1938-2009) का नाम बहुत सम्मान से लिया जाता है. उन्होंने मराठी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखा है. संत तुकाराम की कविताओं का उनका...

चंदन किवाड़ : प्रभात रंजन

चंदन किवाड़ : प्रभात रंजन

प्रसिद्ध लोक गायिका मालिनी अवस्थी ने अवधी, ब्रज, भोजपुरी, काशिका और बुन्देलखड़ी बोलियों के गीतों को देश-प्रदेश में अपने मोहक अंदाज़ में प्रस्तुत किया है. इस प्रक्रिया में अर्जित उनके...

लिटररी कल्चर्स इन अर्ली मॉडर्न नॉर्थ इंडिया करेंट रिसर्च: योगेश प्रताप शेखर

लिटररी कल्चर्स इन अर्ली मॉडर्न नॉर्थ इंडिया करेंट रिसर्च: योगेश प्रताप शेखर

इमरे बंघा और दानूता स्तासिक से हिंदी समाज सुपरिचित है. उनके संपादन में ओयूपी ऑक्सफोर्ड से 2024 में प्रकाशित ‘लिटररी कल्चर्स इन अर्ली मॉडर्न नॉर्थ इंडिया करेंट रिसर्च’ शोध पत्रों...

रंगसाज की रसोई : ओम निश्चल

रंगसाज की रसोई : ओम निश्चल

समकालीन भारतीय कविता के महत्वपूर्ण कवि अरुण कमल के सात कविता संग्रह, दो आलोचना पुस्तकें, साक्षात्कारों की एक किताब और दो अनुवाद पुस्तकें आदि प्रकाशित हैं. उनकी कविताएँ अनेक भाषाओं...

अवधूत कापालिकों का मार्ग और अन्य कविताएँ : बजरंग बिहारी तिवारी

अवधूत कापालिकों का मार्ग और अन्य कविताएँ : बजरंग बिहारी तिवारी

संस्कृत भाषा की समकालीन कविताओं से हम लगभग अपरिचित हैं. समालोचन ने वर्षों पहले बलराम शुक्ल की संस्कृत कविताएँ और साथ में उनके अनुवाद प्रकाशित किये थे. समकालीन संवेदना की...

स्त्री मुग़ल : सुप्रिया पाठक

स्त्री मुग़ल : सुप्रिया पाठक

पवन करण के कविता संग्रह ‘स्त्री मुग़ल’ की कविताओं में इतिहास, आख्यान और संवेदना का सहमेल है. जिन्हें इतिहास भुला देता है, साहित्य उन्हें भी सहेज लेता है. इस संग्रह...

मतलब हिन्दू : महेश कुमार

मतलब हिन्दू : महेश कुमार

‘मतलब हिन्दू’ के कुछ हिस्से समालोचन पर प्रकाशित होकर पहले ही चर्चित प्रशंसित हो चुके हैं. अब यह ‘हिन्दू त्रयी’ के पहले भाग के रूप में मुद्रित होकर उपलब्ध है....

हमारा इतिहास, उनका इतिहास, किसका इतिहास? : फ़रीद ख़ाँ

हमारा इतिहास, उनका इतिहास, किसका इतिहास? : फ़रीद ख़ाँ

संकीर्ण विचारों से देश तो क्या परिवार नहीं चल सकते. गणतंत्र उदात्त विचारों की नींव पर खड़े होते हैं. करुणा उन्हें महान बनाती है. हम भविष्य बना तो सकते हैं,...

हिमांक और क्वथनांक के बीच : महेश चंद्र पुनेठा

हिमांक और क्वथनांक के बीच : महेश चंद्र पुनेठा

हिमालय और उसके समाज पर शेखर पाठक दशकों से लिख रहे हैं. उनकी पुस्तक ‘हिमांक और क्वथनांक के बीच’ केवल यात्रा वृत्त नहीं है. यह उसका सम्पूर्ण पर्यावरण है. इसकी...

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